5 August 2026 Fact Recorder
National Desk: राज ठाकरे के आरोपों के बाद सरकार का बड़ा फैसला, दान राशि और सोने-चांदी के चढ़ावे की होगी जांच; अब तक 9 गिरफ्तार, 46 कर्मचारी निलंबित मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में दान राशि में कथित अनियमितताओं को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मंदिर की दान पेटी में पिछले पांच वर्षों के दौरान जमा हुई नकदी और चढ़ावे में मिले सोने-चांदी के जेवरात का विस्तृत ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। सरकार के इस फैसले के बाद मंदिर प्रशासन और संबंधित अधिकारियों में हलचल तेज हो गई है।
यह कार्रवाई महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद सामने आई है। राज ठाकरे ने दावा किया था कि सिद्धिविनायक मंदिर की दान पेटी से हर साल करीब 18 करोड़ रुपये की हेराफेरी की जा रही थी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को एक पत्र भी भेजा गया था, जिसमें मंदिर कर्मचारियों की संलिप्तता का जिक्र था।
राज ठाकरे का कहना था कि कुछ कर्मचारियों के पकड़े जाने के बाद मंदिर में दान की औसत राशि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जिससे अनियमितताओं की आशंका और मजबूत होती है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की।
हालांकि, सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसने स्वयं मई महीने में कानून एवं न्याय विभाग को पत्र लिखकर पिछले पांच वर्षों के दान का ऑडिट कराने की मांग की थी। ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवणकर ने बताया कि दान राशि में गड़बड़ी की जानकारी मिलते ही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को शिकायत दी गई थी, जिसके बाद जांच शुरू हुई और मंदिर में अतिरिक्त पुलिस सुरक्षा भी तैनात की गई।
ट्रस्ट के अनुसार, मार्च में सीसीटीवी फुटेज की जांच के दौरान कुछ कर्मचारी दान पेटी से नकदी निकालते हुए पकड़े गए थे। इस मामले में अब तक मुख्य आरोपी राजन पेंडुलकर समेत 9 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 46 कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। ट्रस्ट ने इस पूरे मामले की सीआईडी जांच कराने की भी मांग की है।
मंदिर प्रशासन ने यह भी बताया कि दान चोरी के अलावा ऑनलाइन भुगतान लेकर अवैध वीआईपी दर्शन कराने, फूल विक्रेताओं और टैक्सी चालकों के जरिए चल रहे अवैध नेटवर्क पर भी कार्रवाई की गई है। प्रशासन का दावा है कि ऐसी गतिविधियों पर अब प्रभावी रोक लगा दी गई है।
इस बीच ट्रस्ट अध्यक्ष सदा सरवणकर ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार किए गए कुछ कर्मचारियों के संबंध पूर्व ट्रस्ट बोर्ड और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) से जुड़े लोगों से थे। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
उधर, शिवसेना (यूबीटी) की नेता और मुंबई की पूर्व मेयर किशोरी पेडणेकर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया। उन्होंने कहा कि दोष तय करने का काम जांच एजेंसियों का है और बिना जांच के किसी राजनीतिक दल पर आरोप लगाना उचित नहीं है। साथ ही उन्होंने ट्रस्ट प्रशासन से नैतिक जिम्मेदारी लेने की भी मांग की।













