31 July 2026 Fact Recorder
Health Desk: इंसुलिन रेजिस्टेंस को अक्सर केवल डायबिटीज से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर डायबिटीज होने से पहले ही हृदय और रक्त वाहिकाओं पर पड़ना शुरू हो सकता है। समय रहते इसकी पहचान और सही जीवनशैली अपनाकर कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम किया जा सकता है।
इंसुलिन एक हार्मोन है, जो रक्त में मौजूद ग्लूकोज को शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाकर ऊर्जा में बदलने में मदद करता है। लेकिन इंसुलिन रेजिस्टेंस की स्थिति में शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाती हैं। इसके कारण अग्न्याशय (पैंक्रियास) अधिक मात्रा में इंसुलिन बनाता है और लंबे समय तक शरीर में इंसुलिन का स्तर बढ़ा रहने से हृदय और रक्त वाहिकाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
एंडोक्राइनोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. प्रिया के अनुसार, इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत प्रभावित होने लगती है, जिससे उनकी लचीलापन कम हो जाता है और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा शरीर में ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ने लगता है, जबकि अच्छा कोलेस्ट्रॉल (HDL) कम हो जाता है। लगातार बनी रहने वाली हल्की सूजन और अन्य हानिकारक तत्व रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं।
समय के साथ धमनियों में चर्बी जमा होने लगती है, जिससे वे संकरी और कठोर हो जाती हैं। इससे हृदय और मस्तिष्क तक रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है और हार्ट अटैक, स्ट्रोक तथा अन्य हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इंसुलिन रेजिस्टेंस का समय पर पता चल जाए तो इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और वजन को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। भोजन में हरी सब्जियां, मौसमी फल, साबुत अनाज और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे ओट्स शामिल करने चाहिए। साथ ही तली-भुनी और अधिक वसा वाली चीजों से बचना चाहिए।
स्वस्थ रहने के लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि या तेज़ चाल से पैदल चलने की सलाह दी जाती है। वहीं, जिन लोगों को पहले से हृदय संबंधी बीमारी है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही व्यायाम और जीवनशैली अपनानी चाहिए। साथ ही खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को नियंत्रित रखना भी दिल की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।













