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सावन में नॉनवेज खाने से क्यों किया जाता है परहेज? जानिए धार्मिक ही नहीं, वैज्ञानिक वजह भी

31 July 2026 Fact Recorder

Lifestyle Desk: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का पवित्र समय माना जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग धार्मिक आस्था के चलते मांसाहार, शराब और तामसिक भोजन से दूरी बनाते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि सावन में नॉनवेज से परहेज करने के पीछे केवल धार्मिक मान्यताएं ही नहीं, बल्कि कुछ वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संबंधी कारण भी हैं।

डायटिशियन पायल दत्त के अनुसार, सावन का महीना बारिश के मौसम में आता है, जब वातावरण में नमी अधिक होती है। इस दौरान यदि मांस, चिकन या मछली को सही तरीके से संग्रहित या पकाया न जाए, तो उनमें बैक्टीरिया तेजी से पनप सकते हैं। इससे फूड पॉइजनिंग और पेट के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार, वर्षा ऋतु में शरीर की पाचन शक्ति (जठराग्नि) सामान्य दिनों की तुलना में कमजोर हो जाती है। ऐसे में मांसाहार जैसे भारी भोजन को पचाने में अधिक समय लगता है, जिससे अपच, गैस और पेट संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए इस मौसम में हल्का, ताजा और आसानी से पचने वाला भोजन लेने की सलाह दी जाती है।

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि पुराने समय में रेफ्रिजरेशन जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। ऐसे में बारिश के मौसम में मांसाहार जल्दी खराब होने की संभावना रहती थी, इसलिए लोगों को इससे बचने की सलाह दी जाती थी।

इसके अलावा, मानसून कई पशु-पक्षियों और जलीय जीवों के प्रजनन का मौसम भी होता है। इस दौरान उनके शिकार और अत्यधिक उपयोग से बचना प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने का एक पारंपरिक तरीका माना जाता रहा है।

हालांकि, विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि ऐसी कोई सार्वभौमिक मेडिकल सलाह नहीं है कि सावन में हर व्यक्ति को नॉनवेज पूरी तरह छोड़ देना चाहिए। यदि कोई मांसाहार करता है, तो उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भोजन ताजा, अच्छी तरह पका हुआ और पूरी स्वच्छता के साथ तैयार किया गया हो। स्वास्थ्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात सुरक्षित और स्वच्छ भोजन का सेवन है।