29 July 2026 Fact Recorder
Sports Desk: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पंजाब की बेटी और नाभा के गांव मैहस की रहने वाली वेटलिफ्टर हरजिंदर कौर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत की झोली में रजत पदक डाला है। महिलाओं के 69 किलोग्राम वर्ग में हरजिंदर कौर ने कुल 227 किलोग्राम वजन उठाकर दूसरा स्थान हासिल किया और देश का गौरव बढ़ाया।
इस मुकाबले में कनाडा की चार्लोट सिमोन ने 240 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जबकि ऑस्ट्रेलिया की नाया फेब हेमन ने 218 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक जीता।
जैसे ही देर रात मुकाबले के नतीजे घोषित हुए, नाभा स्थित हरजिंदर के घर में जश्न का माहौल बन गया। परिवार को बधाइयां देने वालों का तांता लग गया। हरजिंदर के पिता साहिब सिंह ने इस सफलता का श्रेय बेटी की कड़ी मेहनत और ईश्वर की कृपा को दिया।
हरजिंदर की इस उपलब्धि पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी उन्हें बधाई दी। अपने संदेश में राष्ट्रपति ने कहा कि हरजिंदर ने अपने शानदार प्रदर्शन से पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा किया है। उन्होंने कामना की कि वह भविष्य में भी इसी तरह सफलता की नई ऊंचाइयों को छुएं।
मुकाबले से कुछ घंटे पहले हरजिंदर ने अपने भाई प्रीतपाल सिंह से फोन पर बात करते हुए विश्वास जताया था कि वह स्वर्ण या रजत पदक जरूर जीतेंगी। उनका यह आत्मविश्वास सच साबित हुआ और वह सिल्वर मेडल के साथ पोडियम तक पहुंचीं।
हरजिंदर की इस सफलता के पीछे वर्षों का संघर्ष छिपा है। किसान परिवार से आने वाली हरजिंदर के माता-पिता ने आर्थिक तंगी के बावजूद कभी भी उनकी हिम्मत नहीं टूटने दी। प्रशिक्षण, पौष्टिक आहार और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए यात्रा का खर्च जुटाने हेतु उनके पिता ने कर्ज तक लिया, लेकिन बेटी के सपनों को कभी अधूरा नहीं रहने दिया।
बचपन में हरजिंदर रोजाना अपने गांव से नाभा तक करीब पांच किलोमीटर साइकिल चलाकर स्कूल जाती थीं। कई बार साइकिल पंक्चर हो जाती थी, लेकिन वह परिवार की आर्थिक स्थिति को समझते हुए बिना किसी शिकायत के उसे घर तक ले आती थीं। पढ़ाई के साथ-साथ वह खेतों और पशुओं की देखभाल में भी अपने पिता का हाथ बंटाती थीं।
हरजिंदर का खेल सफर कबड्डी से शुरू हुआ। उनके पहले कोच परमजीत शर्मा ने उनकी ताकत को पहचानते हुए पहले रस्साकशी और बाद में वेटलिफ्टिंग की ओर प्रेरित किया। एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने शरीर की बनावट बदलने के डर से इस खेल को छोड़ने का मन बना लिया था, लेकिन माता-पिता ने उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें अपने सपनों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया।
हाल ही में प्रतिष्ठित महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार से सम्मानित हरजिंदर कौर वर्तमान में आयकर विभाग में कार्यरत हैं। वर्षों के संघर्ष के बाद उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हो चुकी है। भावुक होते हुए उनके पिता साहिब सिंह ने कहा, “आज मेरी बेटी ने हमारी वर्षों की मेहनत को सफल बना दिया है। अब मुझे किसी बात की चिंता नहीं है।”













