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स्कूलों में बेहतर हुई दिव्यांग-अनुकूल सुविधाएं, महिला शिक्षकों और छात्राओं की भागीदारी में बढ़ोतरी

8 July 2026 Fact Recorder

Education Desk: शैक्षणिक सत्र 2025-26 में देश के स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी से जुड़े कई महत्वपूर्ण संकेतकों में सकारात्मक सुधार दर्ज किया गया है। नए आंकड़ों के अनुसार, दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं बढ़ी हैं, महिला शिक्षकों की संख्या में इजाफा हुआ है और छात्राओं के नामांकन में भी लगातार वृद्धि देखने को मिली है।

दिव्यांग छात्रों के लिए बेहतर हुई सुविधाएं

देशभर के स्कूलों में हैंडरेल युक्त रैंप की उपलब्धता लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2025-26 में ऐसे स्कूलों का प्रतिशत बढ़कर 58.2% हो गया, जबकि यह 2024-25 में 54.9%, 2023-24 में 52.3% और 2022-23 में 51% था। यह आंकड़े समावेशी और दिव्यांग-अनुकूल शिक्षा व्यवस्था की दिशा में हो रही प्रगति को दर्शाते हैं।

महिला शिक्षकों की संख्या में बढ़ोतरी

शिक्षण क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी भी पहले की तुलना में बेहतर हुई है। वर्ष 2025-26 में कुल शिक्षकों में 54.9% महिला शिक्षक हैं, जो पिछले वर्ष 54.2% थीं। उल्लेखनीय है कि इस सत्र में देश में स्कूल शिक्षकों की कुल संख्या पहली बार 1 करोड़ (10 मिलियन) के आंकड़े को पार कर गई।

छात्राओं के नामांकन में भी सुधार

स्कूलों में छात्राओं का नामांकन भी लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2025-26 में छात्राओं की हिस्सेदारी 48.4% रही, जबकि 2024-25 में 48.3%, 2023-24 में 48.1% और 2022-23 में 48% थी। यह शिक्षा तक लड़कियों की बढ़ती पहुंच और उनकी मजबूत होती भागीदारी का संकेत है।

स्कूल छोड़ने की दर में आई कमी

बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं और आधारभूत ढांचे के कारण माध्यमिक स्तर पर छात्रों के स्कूल छोड़ने की दर 8.2% से घटकर 7.0% हो गई है। वहीं, प्रारंभिक (प्रीपरेटरी) स्तर पर यह दर घटकर 1.8% रह गई है।

समावेशी शिक्षा की दिशा में सकारात्मक कदम

नए आंकड़े बताते हैं कि देश में शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी, सुरक्षित और लैंगिक समानता आधारित बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। स्कूलों में बेहतर बुनियादी सुविधाओं और महिला शिक्षकों की बढ़ती भागीदारी से छात्रों के लिए अनुकूल शैक्षणिक वातावरण तैयार हो रहा है।