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किन्नौर में मूसलाधार बारिश से बाढ़ और भूस्खलन का कहर, शिमला-रिकांगपिओ एनएच कई घंटे बंद, 12 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट

4 July 2026 Fact Recorder

Himachal Desk:  हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में शुक्रवार तड़के हुई मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया। सुबह करीब चार बजे चोलिंग क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ और भारी मलबे के कारण शिमला-रिकांगपिओ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) करीब छह घंटे तक बंद रहा। सड़क पर लगभग 30 मीटर तक मलबा जमा होने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया। प्रशासन और मशीनरी की मदद से सुबह करीब 10 बजे मार्ग को बहाल किया गया।

बारिश के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजर रही दो कारें भी मलबे की चपेट में आ गईं। राहत की बात यह रही कि दोनों वाहन समय रहते रुक गए, जिससे कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। वहीं रिब्बा क्षेत्र में आई बाढ़ के कारण रिब्बा-कंडे संपर्क मार्ग भी मलबे से भर गया है और फिलहाल वाहनों की आवाजाही बंद है।

मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटों में शिमला के जुब्बड़हट्टी में 44 मिमी, मंडी के बलद्वाड़ा में 32 मिमी, सराहन में 27 मिमी और बिलासपुर में 26 मिमी बारिश दर्ज की गई। बारिश के बीच प्रदेश के कई इलाकों में अधिकतम तापमान में भी वृद्धि देखने को मिली। कुल्लू के भुंतर में 6.2 डिग्री, मनाली में 5.5 डिग्री, मंडी में 5.2 डिग्री और केलांग में 4.7 डिग्री सेल्सियस तक तापमान बढ़ा है।

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने 5 जुलाई से प्रदेश में मानसून के और अधिक सक्रिय होने की संभावना जताई है। विभाग ने 12 जुलाई तक विभिन्न जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है तथा लोगों को नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी है।

आंकड़ों के अनुसार, जून महीने में हिमाचल प्रदेश में केवल 64.9 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से 36 प्रतिशत कम रही और वर्ष 1901 के बाद जून की 44वीं सबसे कम बारिश मानी गई। हालांकि मानसून की शुरुआत के बाद स्थिति तेजी से बदली है।

मानसून के प्रवेश के बाद बीते तीन दिनों में प्रदेश में सामान्य से 106 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है। अकेले किन्नौर जिले में तीन दिनों के दौरान 18.3 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 423 प्रतिशत अधिक है। बादल फटने, भूस्खलन और बाढ़ जैसी घटनाओं से अब तक प्रदेश को लगभग 16 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। फिलहाल राज्य में 49 सड़कें और तीन बिजली ट्रांसफार्मर अभी भी प्रभावित हैं, जबकि राहत एवं बहाली का कार्य लगातार जारी है।