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NEET-UG परीक्षा में बड़े सुधारों की सिफारिश, NTA को वैधानिक दर्जा देने पर संसदीय समिति का जोर

02 July 2026  Fact Recorder

Education Desk:  नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बाद संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति ने राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों की सिफारिश की है। समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को अधिक अधिकार देने और उसे वैधानिक दर्जा प्रदान करने की जरूरत पर बल दिया है, ताकि भविष्य में परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और प्रभावी बनाया जा सके।

बुधवार को हुई समिति की बैठक में एनटीए के अधिकारियों और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ परीक्षा व्यवस्था, हाल ही में आयोजित नीट-यूजी पुनर्परीक्षा और भविष्य की तैयारियों पर विस्तृत चर्चा की गई। समिति ने पुनर्परीक्षा के सफल आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली में दीर्घकालिक सुधार भी जरूरी हैं।

समिति की प्रमुख सिफारिशें

सूत्रों के अनुसार, समिति ने सुझाव दिया कि नीट-यूजी परीक्षा केवल एक चरण में आयोजित करने के बजाय कई चरणों में कराई जाए। साथ ही परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (CBT) और पेपरलेस बनाया जाए। समिति ने यह भी सुझाव दिया कि परीक्षा का आयोजन JEE Main की तर्ज पर अलग-अलग शिफ्टों में किया जाए, जिससे सुरक्षा और प्रबंधन दोनों बेहतर हो सकें।

इसके अलावा समिति ने एमबीबीएस, आयुष और नर्सिंग जैसे विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए अलग-अलग प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने की सिफारिश की, ताकि एक ही परीक्षा पर अत्यधिक दबाव कम किया जा सके।

NTA को मिले कानूनी अधिकार

सांसदों ने कहा कि देशभर में इतनी बड़ी परीक्षा स्वतंत्र रूप से आयोजित करने के लिए एनटीए को अधिक अधिकार और वैधानिक दर्जा मिलना चाहिए। उनका मानना है कि इससे एजेंसी की जवाबदेही और कार्यक्षमता दोनों मजबूत होंगी तथा परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों और धोखाधड़ी पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।

समिति ने परीक्षा प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीकों के अधिक उपयोग की भी सिफारिश की, ताकि परीक्षा की निगरानी और सुरक्षा को और मजबूत बनाया जा सके।

CBT को लेकर जताई चिंता

हालांकि समिति ने कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली का समर्थन किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इसे लागू करते समय समाज के वंचित और ग्रामीण वर्गों के छात्रों के हितों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। सदस्यों का कहना था कि सभी छात्रों को कंप्यूटर और डिजिटल संसाधनों तक समान पहुंच उपलब्ध नहीं है।

अगले साल की तैयारी पर उठे सवाल

बैठक के दौरान समिति के सदस्यों ने एनटीए अधिकारियों से यह भी पूछा कि अगले वर्ष इतनी बड़ी परीक्षा एजेंसी अपने दम पर किस प्रकार आयोजित करेगी, जबकि हालिया पुनर्परीक्षा पूरे सरकारी तंत्र की सक्रिय भागीदारी से सफल हो सकी थी। इस पर सांसदों ने एनटीए को संस्थागत रूप से और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता दोहराई।

राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों पर भी चर्चा

बैठक में परीक्षा सुधारों के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति के अध्यक्ष और इसरो के पूर्व अध्यक्ष आर. राधाकृष्णन ने बताया कि उनकी समिति द्वारा दी गई सिफारिशों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। वहीं एनटीए के महानिदेशक और शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने 21 जून को आयोजित नीट-यूजी पुनर्परीक्षा के अनुभवों और भविष्य की रणनीति से समिति को अवगत कराया।

गौरतलब है कि 3 मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दी गई थी, जिसके बाद 21 जून को पुनर्परीक्षा कराई गई। मामले की जांच फिलहाल सीबीआई कर रही है।