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जंगलों की सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

नई दिल्ली: 20 June 2026 Fact Reorder

National Desk :  सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के जंगलों और प्राकृतिक पर्यावरण की सुरक्षा को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि झारखंड जैसे राज्यों के वन क्षेत्रों और पारिस्थितिकी तंत्र को हर हाल में संरक्षित रखा जाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।

सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि देश में कुछ ही ऐसे राज्य बचे हैं जहां प्राकृतिक पर्यावरण अब भी सुरक्षित है और झारखंड उनमें प्रमुख है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संपदा से भरपूर इन क्षेत्रों की रक्षा करना बेहद जरूरी है।

मामला झारखंड हाई कोर्ट के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें जंगलों के आसपास पत्थर खनन और स्टोन क्रशर लगाने पर प्रतिबंध संबंधी निर्देश जारी किए गए थे। हाई कोर्ट ने पहले आदेश दिया था कि संरक्षित जंगलों की सीमा से एक किलोमीटर के दायरे में खनन और स्टोन क्रशर की अनुमति नहीं दी जाएगी। बाद में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जंगलों से 500 मीटर के भीतर खनन और 400 मीटर के भीतर स्टोन क्रशर लगाने पर रोक जारी रहेगी।

यह विवाद JSPCB की उस अधिसूचना को लेकर शुरू हुआ था, जिसमें जंगलों के आसपास खनन और क्रशर इकाइयों के लिए न्यूनतम दूरी 400-500 मीटर से घटाकर 250 मीटर कर दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि संबंधित प्राधिकरण ने यह दूरी अचानक क्यों कम कर दी। हालांकि अदालत ने कहा कि मामला अभी हाई कोर्ट में लंबित है, इसलिए अंतिम फैसला वहीं से आने दिया जाना चाहिए। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट एक संवैधानिक अदालत है और उसे यह नहीं बताया जा सकता कि उसे क्या करना चाहिए या नहीं।