11 June 2026 Fact Recorder
Punjab Desk: पंजाब में मानसून आने में अभी कुछ सप्ताह का समय बाकी है, लेकिन उससे पहले ही बढ़ते जलस्तर ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की चिंता बढ़ा दी है। हिमाचल प्रदेश में बढ़ती गर्मी के कारण ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से सतलुज और उसकी सहायक नदियों में जल प्रवाह बढ़ गया है, जिससे भाखड़ा डैम में पानी का स्तर लगातार ऊपर जा रहा है।
भाखड़ा डैम का अधिकतम जलस्तर 1680 फीट निर्धारित है, जबकि वर्तमान में जलस्तर 1578.07 फीट तक पहुंच चुका है। यह स्तर पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 21.47 फीट अधिक बताया जा रहा है। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बीबीएमबी ने पंजाब, हरियाणा और राजस्थान से अपने निर्धारित हिस्से से अधिक पानी लेने का अनुरोध किया है, ताकि मानसून के दौरान आने वाले अतिरिक्त पानी के लिए गोविंद सागर जलाशय में पर्याप्त जगह बनाई जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार जून के अंतिम सप्ताह तक हिमाचल प्रदेश में मानसून सक्रिय हो जाता है, जबकि जुलाई के पहले सप्ताह में पंजाब में भी बारिश शुरू होने की संभावना रहती है। ऐसे में यदि जलाशय में पर्याप्त भंडारण क्षमता नहीं बनाई गई तो भारी बारिश और पहाड़ों से आने वाले अतिरिक्त पानी के कारण बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
बीबीएमबी मुख्यालय में आयोजित तकनीकी समिति की बैठक में जल प्रबंधन, सिंचाई जरूरतों और डैम की स्थिति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने सुझाव दिया कि धान के मौजूदा सीजन को देखते हुए पंजाब और हरियाणा नहरों के माध्यम से अधिक पानी का उपयोग करें, जिससे डैम से अतिरिक्त जल निकासी कर जलाशय में खाली स्थान बनाया जा सके।
वर्तमान जल आवंटन व्यवस्था के तहत पंजाब को 5.512 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ), हरियाणा को 2.987 एमएएफ और राजस्थान को 3.318 एमएएफ पानी दिया जाता है। यह जल-वर्ष 21 मई से शुरू होकर अगले वर्ष 20 मई तक चलता है।
अधिकारियों का कहना है कि मानसून से पहले जलस्तर को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से राज्यों के साथ समन्वय बनाकर जल प्रबंधन की रणनीति पर काम किया जा रहा है, ताकि संभावित बाढ़ के खतरे को टाला जा सके।













