27 अप्रैल 2026 Fact Recorder
Health Desk: आज के डिजिटल दौर में मोबाइल, लैपटॉप और टीवी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, जिसके चलते लोगों का स्क्रीन टाइम भी लगातार बढ़ रहा है। इसका सीधा असर आंखों और दिमाग पर पड़ रहा है, और कई लोग अब बार-बार होने वाले सिरदर्द की शिकायत कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या केवल सामान्य सिरदर्द तक सीमित नहीं है, बल्कि Migraine को भी ट्रिगर कर सकती है।
लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में सूखापन, जलन और थकान महसूस होती है। यह दबाव धीरे-धीरे दिमाग पर असर डालता है, जिससे सिरदर्द की समस्या बढ़ सकती है। कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अगर यह दर्द बार-बार हो रहा है, तो यह माइग्रेन का संकेत भी हो सकता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट आंखों को थका देती है और दिमाग को ज्यादा सक्रिय बनाए रखती है। खासकर अंधेरे में मोबाइल इस्तेमाल करना या स्क्रीन को बहुत करीब से देखना इस समस्या को और बढ़ा सकता है। माइग्रेन से पहले कुछ लोगों को आंखों के सामने चमक, सिर में भारीपन या तेज रोशनी से परेशानी जैसे लक्षण भी महसूस होते हैं।
जिन लोगों का काम पूरे दिन कंप्यूटर या मोबाइल पर निर्भर है, उनमें माइग्रेन का खतरा ज्यादा होता है। इसके अलावा, पहले से माइग्रेन से जूझ रहे लोग, बच्चे और युवा भी इस समस्या की चपेट में तेजी से आ रहे हैं। नींद की कमी और आंखों की कमजोरी भी जोखिम बढ़ा सकती है।
बचाव के लिए जरूरी है कि स्क्रीन टाइम को सीमित रखा जाए। हर 20–30 मिनट में ब्रेक लेना, आंखों को आराम देना, स्क्रीन की ब्राइटनेस संतुलित रखना और अंधेरे में मोबाइल इस्तेमाल से बचना मददगार हो सकता है। साथ ही पर्याप्त नींद और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर माइग्रेन के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।













