चंडीगढ़, 24 अप्रैल 2026 Fact Recorder
Business Desk: अगर आप सैलरीड कर्मचारी हैं और कंपनी की ओर से मील कार्ड सुविधा मिलती है, तो यह सिर्फ खाने-पीने तक सीमित नहीं बल्कि टैक्स बचाने का भी एक स्मार्ट तरीका हो सकता है। हालांकि इसका पूरा लाभ तभी मिलता है, जब आप इसके नियमों को सही तरह से समझकर ITR फाइल करें।
आजकल Sodexo, Pluxee और Zaggle जैसे मील कार्ड कर्मचारियों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। इनका इस्तेमाल फूड और ग्रोसरी खरीदने में किया जाता है, जिससे जेब पर बोझ कम होता है।
क्या है टैक्स नियम?
इनकम टैक्स नियमों के मुताबिक AY 2026-27 (FY 2025-26) तक मील कार्ड पर टैक्स छूट केवल पुराने टैक्स रिजीम में ही मिलती है। इस दौरान प्रति मील 50 रुपये तक की छूट दी जाती है। अगर आप रोजाना इसका इस्तेमाल करते हैं, तो यह सालाना अच्छी बचत में बदल सकता है।
हालांकि नए टैक्स नियमों के तहत 2026-27 से बड़ा बदलाव किया गया है। अब मील कार्ड का फायदा पुराने और नए—दोनों टैक्स रिजीम में मिलेगा और छूट की सीमा बढ़ाकर 200 रुपये प्रति मील कर दी गई है।
ITR भरते समय रखें ध्यान
ITR फाइल करते समय सबसे जरूरी है कि आप अपने Form 16 को ध्यान से जांचें। आमतौर पर मील कार्ड का अमाउंट अलग से नहीं दिखता, बल्कि इसे perquisites में शामिल किया जाता है।
भले ही यह बेनिफिट टैक्स-फ्री हो, फिर भी इसे ITR में “exempt perquisites” के तहत सही तरीके से दिखाना जरूरी है। अगर मील कार्ड की वैल्यू तय सीमा से ज्यादा है, तो अतिरिक्त रकम टैक्सेबल सैलरी में जुड़ जाती है।
आम गलतियों से बचें
कई लोग मील कार्ड को पूरी तरह टैक्स-फ्री मान लेते हैं या ITR में इसकी सही जानकारी नहीं देते। इससे बाद में नोटिस या पेनाल्टी का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए ध्यान रखें कि Income Tax Return और Form 16 में दी गई जानकारी एक जैसी हो।
कुल मिलाकर, मील कार्ड एक अच्छा टैक्स सेविंग टूल है, लेकिन इसका सही फायदा तभी मिलेगा जब आप इसके नियमों का पालन करें और ITR फाइलिंग में कोई गलती न करें












