23 अप्रैल 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Himachal Desk: बिलासपुर से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही के चलते एक जीवित महिला को सरकारी रिकॉर्ड में मृ*त घोषित कर दिया गया। इस गलती के कारण 64 वर्षीय शीला देवी की सहारा पेंशन करीब छह महीने तक बंद रही।
जानकारी के अनुसार, शीला देवी का इलाज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर में चल रहा था। वह गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं और बोलने-चलने में असमर्थ हैं। उनके पति बलदेव राज ने बताया कि पहले उनका इलाज आईजीएमसी शिमला और पीजीआई चंडीगढ़ में भी कराया गया था।
दिसंबर 2025 में पेंशन बंद होने के बाद परिवार को इसकी जानकारी मिली। ई-केवाईसी न होने की वजह बताई गई, लेकिन जब उन्होंने लोकमित्र केंद्र और बाद में सीएमओ कार्यालय में जांच करवाई, तो पता चला कि रिकॉर्ड में शीला देवी को छह महीने पहले ही मृ*त दिखाया जा चुका है।
बलदेव राज ने फरवरी 2026 में सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ विभाग को लिखित सूचना दी कि उनकी पत्नी जीवित हैं, लेकिन इसके बावजूद महीनों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस दौरान इलाज के बढ़ते खर्च और पेंशन बंद होने से परिवार को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शशि दत्त शर्मा ने इसे तकनीकी खामी बताते हुए कहा कि गलती को सुधार दिया गया है और पेंशन बहाल करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।












