23 अप्रैल 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
National Desk: देशभर में अभिभावकों की शिकायतों के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने प्राइवेट स्कूलों द्वारा महंगी प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें खरीदने के दबाव के मामले में सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने सभी राज्य सरकारों और शिक्षा मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह कार्रवाई नमो फाउंडेशन की शिकायत के आधार पर की गई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि निजी स्कूल अभिभावकों पर महंगी किताबें खरीदने का दबाव बना रहे हैं।
आयोग ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे राष्ट्रीय स्कूल बैग नीति और शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 29 का पालन सुनिश्चित करें और इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट पेश करें। साथ ही, SCERT द्वारा प्रकाशित पुस्तकों की संख्या और सरकारी व निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के अनुपात से जुड़े आंकड़े भी मांगे गए हैं।
एनएचआरसी ने यह भी कहा कि जब सरकारी स्कूलों में छात्रों को NCERT/SCERT की किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं, तो निजी स्कूलों में अलग और महंगी किताबें लागू करना उचित नहीं है। आयोग के अनुसार, स्कूलों के प्रबंधन (सरकारी या निजी) के आधार पर पाठ्यपुस्तकों और पाठ्यक्रम में अंतर करना अकादमिक भेदभाव की श्रेणी में आता है।
इसके अलावा, शिक्षा मंत्रालय से यह भी पूछा गया है कि कक्षा 8 तक बोर्ड द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम नामित अकादमिक प्राधिकरण से अलग क्यों है। कुल मिलाकर, आयोग का यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।













