छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य कानून 2026 को हाई कोर्ट में चुनौती, आजीवन कारावास पर उठे सवाल

18 अप्रैल 2026 फैक्ट रिकॉर्डर 

National Desk: Chhattisgarh के नए धर्म स्वातंत्र्य कानून 2026 को Chhattisgarh High Court में चुनौती दी गई है। मसीही समाज के प्रतिनिधि Christopher Pal ने याचिका दायर कर कानून के कई प्रावधानों को असंवैधानिक बताया है।

याचिका में कहा गया है कि अवैध मतांतरण के मामलों में 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान अत्यधिक कठोर है। खासकर “सामूहिक मतांतरण” के लिए उम्रकैद की व्यवस्था को मौलिक अधिकारों के खिलाफ बताया गया है। कानून में दो या उससे अधिक लोगों के एक साथ धर्म परिवर्तन को “सामूहिक मतांतरण” माना गया है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि यह कानून भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मिले धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करता है। उन्होंने आरोप लगाया है कि “प्रलोभन”, “दबाव” और “प्रभाव” जैसी परिभाषाएं बहुत अस्पष्ट हैं, जिससे पुलिस और प्रशासन को मनमानी कार्रवाई का अधिकार मिल सकता है।

कानून के तहत धर्म परिवर्तन करने से पहले जिला प्रशासन को सूचना देना, नाम सार्वजनिक करना और आपत्तियां आमंत्रित करना भी अनिवार्य किया गया है। याचिका में इसे निजता और व्यक्तिगत आस्था के अधिकार में दखल बताया गया है।

राज्य सरकार का कहना है कि यह कानून धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने के लिए नहीं, बल्कि दबाव, धोखे, लालच या शादी के जरिए कराए जाने वाले गैर-कानूनी मतांतरण को रोकने के लिए लाया गया है। सरकार का दावा है कि यह कानून केवल अवैध तरीकों पर लागू होगा।

हाल ही में Chhattisgarh High Court ने एक अन्य मामले में कहा था कि किसी व्यक्ति को अपने घर में प्रार्थना सभा आयोजित करने के लिए सरकार से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है, जब तक उससे कानून-व्यवस्था या सार्वजनिक शांति प्रभावित न हो। इस फैसले को भी याचिका में धर्म की स्वतंत्रता के समर्थन में उदाहरण के तौर पर रखा गया है