23 मार्च 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
National Desk: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हुई है। ऐसे हालात में भारत की कूटनीतिक सक्रियता का असर दिखाई दे रहा है। रूस के बाद अब अमेरिका से भी एलपीजी लेकर एक जहाज भारत पहुंच गया है, जिससे देश को बड़ी राहत मिली है।
रविवार को अमेरिकी एलपीजी कार्गो जहाज Pyxis Pioneer करीब 16,714 मीट्रिक टन गैस लेकर New Mangalore Port पहुंचा। यह जहाज 14 फरवरी को अमेरिका के Port of Nederland से रवाना हुआ था। भारत पहुंचने के बाद इस गैस को ऊर्जा लॉजिस्टिक्स कंपनी Aegis Logistics के टर्मिनल पर उतारा गया।
इससे एक दिन पहले रूस का तेल टैंकर Aqua Titan भी एक लाख टन से अधिक कच्चा तेल लेकर मंगलूरू पहुंचा था। यह टैंकर पहले चीन जा रहा था, लेकिन बाद में इसका रुख भारत की ओर मोड़ दिया गया। जहाज में करीब 7.7 लाख बैरल कच्चा तेल बताया गया है।
दरअसल, पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण Strait of Hormuz के आसपास करीब 700 जहाज फंसे हुए हैं। इस समुद्री मार्ग से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति होती है। जहाजों के फंसने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है और कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और रूस से लगातार आपूर्ति मिलने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। मंगलूरू में देश की सबसे बड़ी भूमिगत एलपीजी भंडारण सुविधा भी मौजूद है, जो समुद्र तल से करीब 225 मीटर नीचे स्थित है और इसकी क्षमता लगभग 80,000 मीट्रिक टन है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकट के बीच भी भारत ने अपने ऊर्जा स्रोतों को सुरक्षित रखने के लिए समय रहते कूटनीतिक और रणनीतिक कदम उठाए हैं।













