11 मार्च 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Business Desk: केंद्र सरकार ने भारत से जमीन की सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले निवेश को लेकर विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) नीति में अहम बदलाव को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। सरकार का कहना है कि इस कदम से स्टार्टअप, डीप-टेक और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में भागीदारी मजबूत होगी। भारत के साथ जमीन की सीमा साझा करने वाले देशों में China, Bangladesh, Pakistan, Bhutan, Nepal, Myanmar और Afghanistan शामिल हैं।
दरअसल, कोविड-19 महामारी के दौरान 2020 में सरकार ने नियम बनाया था कि भारत की सीमा से लगे किसी भी देश का निवेश भारत में तभी हो सकेगा जब उसे सरकार की मंजूरी (Government Route) मिले। इसका उद्देश्य उस समय भारतीय कंपनियों के सस्ते अधिग्रहण को रोकना था। अब कैबिनेट ने उसी नियम में आंशिक संशोधन करते हुए ‘Beneficial Owner’ यानी वास्तविक मालिक की स्पष्ट परिभाषा जोड़ी है, जो मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम नियमों के अनुरूप होगी। नए प्रावधान के तहत यदि किसी निवेश में सीमा से लगे देश के निवेशक की 10 प्रतिशत तक की गैर-नियंत्रक हिस्सेदारी है, तो ऐसे निवेश को ऑटोमैटिक रूट के तहत अनुमति मिल सकती है, हालांकि भारतीय कंपनी को इसके सभी विवरण सरकार को बताने होंगे।
सरकार ने कुछ रणनीतिक मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों के लिए फास्ट-ट्रैक मंजूरी प्रक्रिया भी तय की है। इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक कैपिटल गुड्स, कैपिटल गुड्स और सोलर वैल्यू-चेन से जुड़े सेक्टरों में आने वाले निवेश प्रस्तावों पर 60 दिनों के भीतर फैसला लेना अनिवार्य होगा। इन परियोजनाओं में कंपनी का बहुमत नियंत्रण भारतीय नागरिकों या भारतीय संस्थाओं के पास ही रहेगा। सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से निवेश प्रक्रिया तेज होगी, वैश्विक निवेश फंड्स को स्पष्टता मिलेगी और भारत में विदेशी निवेश बढ़ने के साथ नई तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को भी बढ़ावा मिलेगा।











