08 मार्च 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Himachal Desk: हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि पहाड़ी राज्य के समग्र विकास के लिए मजबूत कार्य संस्कृति का होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि समाज और राजनीतिक दल मिलकर काम नहीं करेंगे तो हिमाचल विकास की दौड़ में पीछे रह सकता है।
शिमला में मीडिया से बातचीत के दौरान राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश के विकास के लिए सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा और कार्य संस्कृति को अपनाना होगा। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में उन्होंने प्रदेश के लोगों को करीब से समझने की कोशिश की है और पाया है कि हिमाचल में काम करने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
राज्यपाल ने कहा कि समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर विकास के अवसरों को बढ़ाना जरूरी है, तभी प्रदेश तेजी से आगे बढ़ सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि अब वे तेलंगाना के राज्यपाल का कार्यभार संभालेंगे। वहीं हिमाचल प्रदेश के नए राज्यपाल के रूप में कविंद्र गुप्ता जिम्मेदारी संभालेंगे। शुक्ल सोमवार को हिमाचल से रवाना होंगे। इससे पहले उन्होंने मीडिया से कई अहम मुद्दों पर चर्चा की।
नशा मुक्त हिमाचल अभियान में मीडिया की अहम भूमिका
राज्यपाल ने मीडिया का आभार जताते हुए कहा कि “नशा मुक्त हिमाचल” अभियान को आगे बढ़ाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि इस अभियान में मीडिया ने बढ़-चढ़कर सहयोग दिया है। साथ ही उन्होंने पत्रकारों से सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को समय-समय पर उठाने की अपील की, ताकि समाज में जागरूकता बढ़ सके।
केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर करना चाहिए काम
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को विकास के लिए मिलकर काम करना चाहिए। जीएसटी व्यवस्था का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पांच वर्षों तक राज्यों को होने वाले नुकसान की भरपाई की, लेकिन अब राज्यों को अपने संसाधनों के आधार पर आगे बढ़ना होगा।
सरकार से टकराव के सवाल पर दी सफाई
लोकभवन और राज्य सरकार के बीच टकराव के सवाल पर राज्यपाल ने कहा कि दोनों के बीच किसी तरह का टकराव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार से आए मामलों पर संवैधानिक दायरे में रहकर कार्रवाई की गई है और कई मामलों में अंतिम निर्णय केंद्र सरकार की मंजूरी पर निर्भर करता है।
संवैधानिक पदों का सम्मान राजनीति से ऊपर
पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के दौरे से जुड़े प्रोटोकॉल के सवाल पर उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद है और उनके सम्मान में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों का सम्मान राजनीति से ऊपर होना चाहिए।













