विकसित भारत की नींव मजबूत: सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए NMP 2.0 मास्टर प्लान किया लॉन्च

25 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Business Desk:  भारत को “विकसित राष्ट्र” बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन 2.0 (NMP 2.0) लॉन्च कर दिया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत सरकार 12 मंत्रालयों से जुड़े 2,000 से ज्यादा ब्राउनफील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स को मोनेटाइज कर करीब 16.7 लाख करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है।

यह पहल निजीकरण नहीं, बल्कि तय अवधि के लिए पहले से तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर को ऑपरेट और मेंटेन कराने पर आधारित है। इसका मकसद इन एसेट्स से मिलने वाली राशि को नए ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स में निवेश करना और आर्थिक विकास को तेज करना है। यह योजना नीति आयोग और संबंधित मंत्रालयों के साथ मिलकर तैयार की गई है और यूनियन बजट 2025-26 में घोषित एसेट मोनेटाइजेशन रोडमैप का हिस्सा है।

सरकार के अनुमान के मुताबिक 2025-26 से 2029-30 के बीच करीब 10.8 लाख करोड़ रुपये की कमाई होगी, जबकि बाकी रकम बाद के वर्षों में आएगी। नीति आयोग की रिपोर्ट का आकलन है कि NMP 2.0 से अगले 5 से 10 सालों में भारतीय अर्थव्यवस्था पर लगभग 40 लाख करोड़ रुपये का सकारात्मक GDP प्रभाव पड़ सकता है।

किस सेक्टर से कितनी कमाई की उम्मीद
NMP 2.0 में सड़कों और हाईवे सेक्टर को सबसे बड़ा हिस्सा मिला है, जिससे करीब 4.42 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है। इसके बाद पावर सेक्टर से 2.76 लाख करोड़, पोर्ट्स से 2.63 लाख करोड़ और रेलवे से 2.62 लाख करोड़ रुपये की उम्मीद जताई गई है। इसके अलावा कोयला, खनन, सिविल एविएशन, अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर, पेट्रोलियम, गैस, टेलीकॉम और टूरिज्म जैसे सेक्टर भी इस योजना का हिस्सा हैं।

फिस्कल दबाव बिना बढ़ाए विकास पर जोर
इस योजना का बड़ा फायदा यह है कि सरकार को नॉन-टैक्स और नॉन-डेट कैपिटल रिसीट मिलेगी, जिससे बिना अतिरिक्त कर्ज लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश संभव होगा। इससे फिस्कल डेफिसिट पर दबाव कम रहेगा और कैपिटल एक्सपेंडिचर की रफ्तार बनी रहेगी।

प्राइवेट कैपिटल को मिलेगा बढ़ावा
NMP 2.0 के जरिए सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs), PPP मॉडल और लॉन्ग-टर्म लीज जैसे विकल्पों के जरिए घरेलू और विदेशी निजी निवेश को आकर्षित करना चाहती है। इससे न सिर्फ पब्लिक सेक्टर बैंकों पर बोझ घटेगा, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग का पूरा इकोसिस्टम और मजबूत होगा।

कुल मिलाकर, NMP 2.0 सरकार की उस रणनीति को दर्शाता है, जिसमें मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर से वैल्यू अनलॉक कर भविष्य की ग्रोथ को फंड किया जाएगा। अगर यह योजना तय समय और सही तालमेल के साथ लागू होती है, तो यह भारत के विकास सफर में एक बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकती है।