AI Education in China: चीन में प्राइमरी क्लास के बच्चों को भी AI एजुकेशन, ड्रैगन ने उठाया बड़ा कदम

19 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Education Desk: दिल्ली के भारत मंडपम में 16 से 20 फरवरी तक आयोजित India AI Impact Summit 2026 ने दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती ताकत को रेखांकित किया। समिट का उद्घाटन नरेंद्र मोदी ने किया, जिसमें 13 देशों की भागीदारी और 3000 से अधिक विशेषज्ञ शामिल हुए। इस मंच से साफ संकेत मिला कि एआई अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बन चुका है। इसी दौड़ में आगे रहने के लिए चीन ने एजुकेशन सेक्टर में बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है।

चीन में AI एजुकेशन को बनाया अनिवार्य

चीन की राजधानी बीजिंग के प्रशासन ने प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूलों में एआई एजुकेशन को अनिवार्य कर दिया है। 1 सितंबर 2025 से शुरू हुए नए शैक्षणिक सत्र के तहत छात्रों को हर साल कम से कम आठ घंटे का एआई प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए एक चरणबद्ध सिस्टम तैयार किया गया है, जिसमें प्राइमरी, जूनियर हाई और सीनियर हाई स्कूल शामिल हैं। उद्देश्य बच्चों को शुरुआती समझ से लेकर टेक्निकल इनोवेशन तक तैयार करना है।

प्राइमरी लेवल पर क्या पढ़ाया जा रहा है

प्राइमरी कक्षाओं में बच्चों को वॉइस रिकॉग्निशन, इमेज पहचान और एआई की बुनियादी अवधारणाओं से परिचित कराया जा रहा है। जूनियर हाई स्तर पर मशीन लर्निंग की प्रक्रिया, एआई लॉजिक और जनरेटिव एआई से जुड़ी गलत सूचनाओं की पहचान सिखाई जा रही है। इसके साथ ही एआई एथिक्स पर भी विशेष फोकस रखा गया है। स्कूलों को यह विकल्प दिया गया है कि वे एआई को साइंस और आईटी जैसे विषयों में शामिल करें या अलग कोर्स के रूप में पढ़ाएं।

होमवर्क भी AI से हो रहा है चेक

चीन में अब कई स्कूलों में होमवर्क जांचने के लिए भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल हो रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा गया है कि एआई सिस्टम छात्रों की हस्तलिखित कॉपियां स्कैन करता है, गलतियां पहचानता है, अंक देता है और कुछ ही सेकंड में विस्तृत फीडबैक तैयार कर देता है।

भविष्य की रणनीति का संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह कदम आने वाले 20 वर्षों की रणनीति का हिस्सा है। जहां कई देश अभी एआई एजुकेशन को लेकर असमंजस में हैं, वहीं चीन ने इसे स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाकर यह स्पष्ट कर दिया है कि तकनीकी नेतृत्व की लड़ाई अब कक्षा से ही शुरू होगी। भारत समेत अन्य देशों के लिए भी यह एक मजबूत संकेत है कि एआई एजुकेशन को प्राथमिकता देना अब समय की जरूरत बन चुका है।