13 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Business Desk: देश के बैंकिंग रेगुलेटर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने लोन रिकवरी के नाम पर होने वाली धमकी, दबाव और बदसलूकी पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाया है। RBI ने लोन वसूली प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और मानवीय बनाने के उद्देश्य से नए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं, जिनसे कर्जदारों को मानसिक उत्पीड़न से राहत मिलने की उम्मीद है।
हाल के वर्षों में बैंकिंग सेवाओं का दायरा बढ़ा है, लेकिन इसके साथ ही रिकवरी एजेंटों के गलत व्यवहार की शिकायतें भी सामने आई हैं। बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा ग्राहकों के अधिकारों की सुरक्षा के संकेत देने के बाद अब RBI ने सेकेंड अमेंडमेंट डायरेक्शंस, 2026 का मसौदा जारी किया है। इन प्रस्तावों पर फिलहाल सुझाव मांगे गए हैं और मंजूरी के बाद इन्हें लागू किया जाएगा।
बैंकों की जिम्मेदारी होगी तय
नए नियमों के तहत हर बैंक को स्पष्ट और लिखित लोन रिकवरी पॉलिसी बनानी होगी। जिन ग्राहकों को किस्त चुकाने में परेशानी हो रही है, उनकी पहचान कर समाधान सुझाना बैंक की जिम्मेदारी होगी। साथ ही बैंकों को अपनी वेबसाइट, ऐप और शाखाओं में अधिकृत रिकवरी एजेंटों की सूची सार्वजनिक करनी होगी, ताकि उधारकर्ता को एजेंट की पहचान को लेकर कोई भ्रम न रहे।
यदि किसी ग्राहक ने बैंक में शिकायत दर्ज कराई है, तो शिकायत के निपटारे से पहले मामला रिकवरी एजेंट को नहीं सौंपा जाएगा। यानी पहले सुनवाई होगी, उसके बाद ही वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
रिकवरी एजेंटों पर कड़ी निगरानी
RBI ने रिकवरी एजेंटों के कामकाज के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए हैं। एजेंट केवल सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही ग्राहक से संपर्क कर सकेंगे। उधारकर्ता की निजी जिंदगी और सम्मान का ध्यान रखना अनिवार्य होगा। रिश्तेदारों, दोस्तों या सहकर्मियों को कॉल करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। शादी, शोक या त्योहार जैसे संवेदनशील मौकों पर संपर्क नहीं किया जाएगा।
हर भुगतान पर रसीद देना जरूरी होगा। साथ ही यह भी रिकॉर्ड रखा जाएगा कि कितनी बार और किस समय कॉल की गई। कॉल रिकॉर्डिंग की जाएगी और इसकी जानकारी ग्राहक को पहले से दी जाएगी।
क्या बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगा?
धमकी देना, गाली-गलौज करना, बदनाम करने की कोशिश, सोशल मीडिया के जरिए दबाव बनाना या झूठी कानूनी जानकारी देना—इन सभी पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। RBI ने साफ कर दिया है कि लोन रिकवरी के नाम पर किसी भी तरह की गुंडागर्दी स्वीकार नहीं की जाएगी।
इन नियमों का उद्देश्य साफ है—बैंक अपना बकाया जरूर वसूलें, लेकिन कानून और इंसानियत की सीमाओं में रहकर। इससे न सिर्फ कर्जदारों को राहत मिलेगी, बल्कि बैंकिंग सिस्टम पर भरोसा भी मजबूत होगा।











