मोटापा सेहत के लिए बड़ा खतरा: दिल ही नहीं, लिवर और किडनी भी होते हैं प्रभावित, जानें पूरा विज्ञान

06 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Health Desk: वजन बढ़ना केवल शरीर की बनावट या लुक से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर मेटाबॉलिक स्थिति है, जो शरीर के कई अहम अंगों को नुकसान पहुंचाती है। विशेषज्ञों के अनुसार मोटापा दिल के साथ-साथ लिवर और किडनी की कार्यक्षमता पर भी गहरा असर डालता है।

विसरल फैट है सबसे खतरनाक

जब शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा होती है, तो वह केवल त्वचा के नीचे ही नहीं बल्कि आंतरिक अंगों के आसपास भी इकट्ठा होने लगती है, जिसे विसरल फैट कहा जाता है। यह फैट शरीर में क्रॉनिक सूजन (इन्फ्लेमेशन) पैदा करता है, जो कई बीमारियों की जड़ बनता है।

दिल पर बढ़ता है अतिरिक्त दबाव

मोटापे के कारण दिल को ज्यादा ऊतकों तक खून पहुंचाने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इससे दिल की मांसपेशियां मोटी होने लगती हैं और उसकी पंपिंग क्षमता प्रभावित होती है। साथ ही मोटापा हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल जमने और धमनियों के सिकुड़ने का खतरा बढ़ाता है, जिससे हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

इसके अलावा मोटापा स्लीप एपनिया जैसी समस्या को जन्म देता है, जिसमें नींद के दौरान शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है और दिल पर अतिरिक्त तनाव पड़ता है।

फैटी लिवर की बढ़ती समस्या

मोटापे के कारण लिवर में वसा जमा होने लगती है, जिसे नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) कहा जाता है। यह स्थिति लिवर में सूजन पैदा कर सकती है, जो आगे चलकर लिवर सिरोसिस या लिवर फेलियर का कारण बन सकती है। जब लिवर ठीक से काम नहीं करता, तो शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने की क्षमता भी घट जाती है।

किडनी पर बढ़ता है फिल्ट्रेशन का बोझ

अधिक वजन होने पर किडनी को शरीर की जरूरतों को पूरा करने के लिए ज्यादा खून फिल्टर करना पड़ता है, जिसे हाइपरफिल्ट्रेशन कहा जाता है। लंबे समय तक यह दबाव रहने से किडनी की सूक्ष्म फिल्टरिंग इकाइयां क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। मोटापा डायबिटीज और हाई बीपी का भी प्रमुख कारण है, जो आगे चलकर क्रॉनिक किडनी डिजीज का रूप ले सकता है।

स्वस्थ जीवनशैली ही है बचाव

विशेषज्ञों का कहना है कि वजन कम करना केवल सुंदर दिखने के लिए नहीं, बल्कि दिल, लिवर और किडनी को सुरक्षित रखने के लिए बेहद जरूरी है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद अपनाकर मोटापे से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित है।