06 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
National Desk: देश के विमानन क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर लोकसभा में एक बड़ा और चिंताजनक खुलासा हुआ है। सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, जिन भारतीय एयरलाइंस विमानों की तकनीकी जांच की गई, उनमें से करीब आधे विमानों में बार-बार तकनीकी खराबियां पाई गईं। इस सूची में एयर इंडिया ग्रुप के विमान सबसे ऊपर रहे, जबकि इंडिगो के कई विमानों में भी खामियां सामने आई हैं।
नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने सदन में लिखित जवाब में बताया कि जनवरी 2025 से अब तक देश की छह प्रमुख एयरलाइंस के कुल 754 विमानों की तकनीकी स्थिति का विश्लेषण किया गया। इनमें से 377 विमानों में बार-बार तकनीकी समस्याएं दर्ज की गईं।
आंकड़ों के मुताबिक, इंडिगो के सबसे ज्यादा 405 विमानों की जांच की गई, जिनमें से 148 विमानों में बार-बार खराबी पाई गई। वहीं एयर इंडिया ग्रुप की स्थिति और ज्यादा गंभीर नजर आई। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के कुल 267 विमानों की जांच हुई, जिनमें 191 विमानों में तकनीकी खामियां सामने आईं। यह कुल जांचे गए विमानों का करीब 72 प्रतिशत है।
अलग-अलग आंकड़ों पर नजर डालें तो एयर इंडिया के 166 में से 137 विमानों और एयर इंडिया एक्सप्रेस के 101 में से 54 विमानों में खराबी दर्ज की गई। इसके अलावा स्पाइसजेट के 43 विमानों में से 16 और अकासा एयर के 32 में से 14 विमानों में भी तकनीकी कमियां पाई गईं।
इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए एयर इंडिया के प्रवक्ता ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि एयरलाइन ने अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए अपने पूरे बेड़े की गहन जांच कराई, इसलिए आंकड़े ज्यादा नजर आ रहे हैं। एयर इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, इनमें से अधिकांश कमियां ‘डी श्रेणी’ की हैं, जिनमें सीट, ट्रे टेबल या एंटरटेनमेंट स्क्रीन जैसी छोटी समस्याएं शामिल हैं और इनका उड़ान सुरक्षा से कोई सीधा संबंध नहीं है।
सरकार ने यह भी बताया कि विमानन सुरक्षा को लेकर निगरानी सख्त कर दी गई है। डीजीसीए ने अब तक 3,890 निगरानी निरीक्षण, 56 रेगुलेटरी ऑडिट, 84 विदेशी विमानों की जांच और 492 रैंप इंस्पेक्शन किए हैं। इसके अलावा 874 बिना पूर्व सूचना वाले स्पॉट चेक और 550 नाइट निरीक्षण भी किए गए।
तकनीकी निगरानी को मजबूत करने के लिए डीजीसीए में स्टाफ की संख्या भी बढ़ाई गई है। वर्ष 2022 में जहां तकनीकी पदों की संख्या 637 थी, उसे बढ़ाकर अब 1,063 कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इन कदमों से विमानन सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।













