आज द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

05 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Rashifal Desk:  पंचांग के अनुसार, आज यानी 5 फरवरी 2026, गुरुवार को फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। इस दिन द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है, जो भगवान गणेश को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं और साधक को शुभ फल व मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।

आज की तिथि और योग

  • तिथि: कृष्ण चतुर्थी (06 फरवरी रात्रि 12:22 बजे तक)

  • मास: फाल्गुन

  • दिन: गुरुवार

  • संवत: 2082

  • योग: सुकर्मा (06 फरवरी रात्रि 12:04 बजे तक)

  • करण:

    • बव – दोपहर 12:10 बजे तक

    • बालव – 06 फरवरी रात्रि 12:22 बजे तक

सूर्योदय-सूर्यास्त और चंद्र समय

  • सूर्योदय: प्रातः 07:07 बजे

  • सूर्यास्त: सायं 06:03 बजे

  • चंद्रोदय: रात्रि 09:35 बजे

  • चंद्रास्त: प्रातः 09:05 बजे

आज सूर्य-चंद्र की स्थिति

  • सूर्य राशि: मकर

  • चंद्र राशि: कन्या

आज के शुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 बजे से 12:57 बजे तक

  • अमृत काल: दोपहर 03:32 बजे से सायं 05:11 बजे तक

आज के अशुभ समय

  • राहुकाल: दोपहर 01:57 बजे से 03:19 बजे तक

  • गुलिकाल: प्रातः 09:51 बजे से 11:13 बजे तक

  • यमगण्ड: प्रातः 07:07 बजे से 08:29 बजे तक

आज का नक्षत्र

आज चंद्रदेव उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।

  • नक्षत्र समाप्ति: रात्रि 10:57 बजे तक

  • नक्षत्र स्वामी: सूर्य देव

  • देवता: आर्यमन (मित्रता के देवता)

  • गुण: राजस

  • प्रतीक: बिस्तर

विशेषताएं:
उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे या कार्य करने वाले जातक विनम्र, मेहनती, बुद्धिमान, ईमानदार और परोपकारी स्वभाव के माने जाते हैं।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का महत्व

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को अत्यंत प्रिय तिथि मानी जाती है। इस दिन श्रद्धा के साथ गणपति की पूजा करने से बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता मिलती है। व्रत में दिनभर उपवास रखकर चंद्र दर्शन के बाद पारण करने का विधान है।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर क्या करें

  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें

  • भगवान गणेश का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें

  • दिनभर उपवास या फलाहार करें

  • गणपति को दूर्वा, मोदक और लाल पुष्प अर्पित करें

  • संध्या समय चंद्र दर्शन कर अर्घ्य दें

  • गणेश मंत्र या व्रत कथा का पाठ करें

  • चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करें