इमरान खान नहीं, 30 साल की ईमान मजारी बनीं पाक सेना की बड़ी चुनौती, DG ISPR को कोर्ट में बुलाने की मांग

08 January 2026 Fact Recorder

International Desk: पाकिस्तान में मानवाधिकार वकील और एक्टिविस्ट ईमान मजारी एक बार फिर सुर्खियों के केंद्र में हैं। महज 30 साल की उम्र में ईमान मजारी ने ऐसे कदम उठाए हैं, जिससे पाकिस्तानी सेना और उसकी मीडिया विंग ISPR असहज नजर आ रही है। सेना और राज्य संस्थाओं के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियों के मामले में ईमान मजारी और उनके पति हादी अली चट्ठा के खिलाफ चल रहे केस ने अब नया मोड़ ले लिया है।

बुधवार को ईमान मजारी और उनके पति ने इस्लामाबाद की एक अदालत में याचिका दाखिल कर इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के महानिदेशक यानी DG ISPR को गवाह के तौर पर तलब करने की मांग की। उनका आरोप है कि जनवरी 2026 में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान DG ISPR लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने उन्हें “देशद्रोहियों की वकील” और “विदेशी एजेंट” कहा, जिससे उनके खिलाफ चल रही न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हुई।

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मोहम्मद अफ़ज़ल माजोका ने इस याचिका पर संज्ञान तो लिया, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि अदालत अभियोजन पक्ष को किसी गवाह को पेश करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती। कोर्ट ने याचिका की एक प्रति अभियोजन को जवाब दाखिल करने के लिए दी है और कहा है कि जवाब आने के बाद ही DG ISPR को तलब करने पर कोई फैसला लिया जाएगा।

ईमान मजारी और उनके पति पर प्रिवेंशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट (PECA) के तहत मामला दर्ज है। आरोप है कि उनके सोशल मीडिया पोस्ट्स ने भाषाई आधार पर विभाजन फैलाने की कोशिश की और सशस्त्र बलों को आतंकवाद से जोड़कर पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के गवाह शह्रोज रियाज से जिरह भी हुई, जिसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख तय की।

NCCIA की ओर से दर्ज एफआईआर में कहा गया है कि इस दंपति ने खैबर-पख्तूनख्वा और बलोचिस्तान में जबरन गायब किए जाने के मामलों के लिए सुरक्षा बलों को जिम्मेदार ठहराया। शिकायत में यह भी आरोप है कि ईमान मजारी के बयान और पोस्ट कथित तौर पर प्रतिबंधित संगठनों जैसे बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) की सोच से मेल खाते हैं। वहीं हादी अली चट्ठा पर उनकी पोस्ट्स को दोबारा साझा करने का आरोप लगाया गया है।

हालांकि, ईमान मजारी और उनके पति ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है और इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी को दबाने की कोशिश बताया है।

ईमान मजारी पाकिस्तान की जानी-मानी शख्सियत हैं। वह पूर्व मानवाधिकार मंत्री और इमरान खान सरकार में मंत्री रहीं शिरीन मजारी की बेटी हैं। ईमान ने यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग लॉ स्कूल से पढ़ाई की है और उनका करियर मानवाधिकारों, अल्पसंख्यकों और राज्य हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय की लड़ाई पर केंद्रित रहा है।

अगस्त 2023 में पश्तून तहफ्फुज़ मूवमेंट (PTM) की एक रैली में दिए गए भाषण के बाद ईमान मजारी पहली बार बड़े विवाद में आई थीं। उस दौरान उन्होंने सेना पर नागरिकों के खिलाफ हिंसा और लोकतांत्रिक संस्थानों पर अत्यधिक नियंत्रण का आरोप लगाया था। इसी बयान के बाद उन्हें देशद्रोह और आतंकवाद से जुड़े आरोपों में गिरफ्तार किया गया था।

अब DG ISPR को अदालत में बुलाने की मांग के साथ ईमान मजारी ने साफ संकेत दे दिया है कि वह पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक लड़ाई पीछे हटकर लड़ने वाली नहीं हैं।