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11 जनवरी को सोमनाथ पहुंचेंगे PM मोदी: नेहरू ने क्यों बनाई थी दूरी, और क्यों ऐतिहासिक है यह यात्रा

06 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

National Desk:  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 11 जनवरी को गुजरात स्थित विश्वप्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर का दौरा करेंगे। इस अवसर पर सोमनाथ में ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का आयोजन किया जा रहा है, जिसके तहत 8 से 11 जनवरी तक कई आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। अधिकारियों के अनुसार, इस पर्व के जरिए देश को सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर को भारतीय सभ्यता की अदम्य भावना और आत्मसम्मान का प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा है कि विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा बार-बार किए गए हमलों के बावजूद इस मंदिर का पुनर्निर्माण होना भारत की सांस्कृतिक ताकत और जिजीविषा को दर्शाता है।

सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के 1,000 वर्ष पूरे होने के अवसर पर लिखे अपने एक ब्लॉग में प्रधानमंत्री ने कहा था कि सोमनाथ से बेहतर हमारी सभ्यता की सहनशक्ति और गौरव का उदाहरण शायद ही कोई हो। यह मंदिर संघर्षों और बाधाओं को पार करते हुए आज भी गर्व के साथ खड़ा है।

क्यों अहम है यह यात्रा?
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आज़ादी के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण से सार्वजनिक रूप से दूरी बनाए रखी थी, क्योंकि वे इसे राज्य और धर्म की पृथकता के नजरिये से देखते थे। इसके उलट, वर्तमान सरकार सोमनाथ को राष्ट्रीय स्वाभिमान और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करती रही है।

ऐसे में पीएम मोदी की यह यात्रा न केवल आस्था से जुड़ी है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान, इतिहास और वैचारिक दृष्टिकोण को भी रेखांकित करती है।