हिमाचल प्रदेश में जल संकट पर आईआईटी मंडी का बड़ा खुलासा: कांगड़ा में भरपूर पानी, मंडी में संतुलन, कुल्लू में खतरा

01 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Himachal Desk:  हिमाचल प्रदेश में बढ़ते जल संकट के बीच आईआईटी मंडी के वैज्ञानिकों ने ब्यास बेसिन पर एक अहम शोध किया है। इस अध्ययन से साफ हुआ है कि कांगड़ा जिले में भूजल की भरपूर उपलब्धता, मंडी में संतुलित स्थिति, जबकि कुल्लू और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों में गंभीर जल संकट की आशंका है।

आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ सिविल एंड एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग द्वारा किए गए इस शोध में रिमोट सेंसिंग और जीआईएस आधारित वैज्ञानिक पद्धति से ब्यास बेसिन का विस्तृत भूजल नक्शा तैयार किया गया है। यह नक्शा नीति निर्धारण और जल प्रबंधन के लिए बेहद उपयोगी माना जा रहा है।

शोध के प्रमुख निष्कर्ष
  • पश्चिमी ब्यास बेसिन (कांगड़ा क्षेत्र): देहरा, ज्वालामुखी, ज्वाली, नूरपुर, पौंग बांध क्षेत्र, धर्मशाला के निचले इलाके—यहां अधिक और बहुत अधिक भूजल उपलब्धता पाई गई।

  • मध्य ब्यास बेसिन (मंडी जिला): बल्ह घाटी, सुंदरनगर, जोगिंद्रनगर—यहां मध्यम स्तर की भूजल उपलब्धता दर्ज की गई।

  • पूर्वी ब्यास बेसिन (कुल्लू व ऊंचाई वाले इलाके): कुल्लू, मनाली, बंजार, आनी, रोहतांग और ऊपरी मंडी—यहां कम से बेहद कम भूजल उपलब्धता, भविष्य में संकट गहराने की चेतावनी।
10 साल के आंकड़ों पर आधारित अध्ययन

इस शोध में 2012 से 2021 तक के वर्षा आंकड़ों के साथ भूमि उपयोग, ढाल, ऊंचाई, भूविज्ञान, मिट्टी की बनावट और ड्रेनेज डेंसिटी जैसे कारकों का विश्लेषण किया गया।

क्या है खास पद्धति?

  • रिमोट सेंसिंग से उपग्रह आधारित डेटा

  • जीआईएस मल्टी-लेयर विश्लेषण (10 परतों का संयुक्त अध्ययन)

  • भविष्य की भूजल स्थिति का अनुमान

आईआईटी मंडी के अनुसार यह पद्धति कम खर्चीली, तेज और बड़े क्षेत्रों में लागू करने योग्य है। इससे सरकार को जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज और दीर्घकालीन जल योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी। यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय जर्नल Environmental Earth Sciences में प्रकाशित हुआ है।