चीन में आज से शुरू हुआ नया K-Visa, क्या यह अमेरिका के H-1B वीजा का विकल्प बन सकेगा?

चीन में आज से शुरू हुआ नया K-Visa, क्या यह अमेरिका के H-1B वीजा का विकल्प बन सकेगा?

01 अक्टूबर 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

International Desk: चीन में आज से लागू हुआ नया K-Visa: क्या यह अमेरिका के H-1B वीजा का विकल्प बन सकेगा?
चीन ने आज से अपनी नई K-Visa नीति लागू कर दी है। विशेषज्ञ इसे अमेरिका की कड़ी वीजा पॉलिसी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया फैसले के जवाब के रूप में देख रहे हैं। ट्रंप ने हाल ही में घोषणा की थी कि अमेरिका में विदेशी प्रतिभाओं को नौकरी देने वाली कंपनियों को H-1B वीजा के लिए अब अधिक शुल्क चुकाना होगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या चीन का नया K-Visa अमेरिका के H-1B का विकल्प बन पाएगा।

क्या है K-Visa?
नई नीति के तहत चीन ने विदेशी प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए वीजा नियमों में बदलाव किया है।
यह वीजा खासतौर पर विज्ञान और तकनीक से जुड़े युवा पेशेवरों के लिए है।
प्रतिभाशाली युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम में अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष और उत्कृष्ट युवा वैज्ञानिक (विदेशी) निधि परियोजना में 40 वर्ष रखी गई है।
K-Visa धारकों को चीन में आने-जाने और काम करने की अवधि में अधिक छूट मिलेगी।
वे शिक्षा, संस्कृति, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप और कारोबारी गतिविधियों में भी हिस्सा ले सकेंगे।

अन्य वीजा से कैसे अलग है?
2013 में चीन ने 12 सामान्य वीजा श्रेणियां लागू की थीं, जैसे—
Z-Visa (काम के लिए)
X-Visa (पढ़ाई के लिए)
M-Visa (बिजनेस के लिए)
Q-Visa (परिवार से मिलने के लिए)
लेकिन K-Visa इन सबसे अलग है क्योंकि यह विशेष रूप से STEM (Science, Technology, Engineering, Mathematics) क्षेत्रों से जुड़ी प्रतिभाओं के लिए है।

आवेदन की शर्तें
मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या रिसर्च संस्थान से STEM में स्नातक डिग्री।
संबंधित क्षेत्र में शिक्षा या शोध कार्य का अनुभव।
चीनी नियमों के अनुसार आवश्यक दस्तावेज जमा करना।

K-Visa की वजह
चीन का मानना है कि यह योजना विज्ञान और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देगी और योग्य व्यक्तियों के लिए बाधाएं कम होंगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका में जहां AI डिग्री में छात्रों की रुचि घट रही है, वहीं चीन में इसकी लोकप्रियता 88% तक बढ़ी है।

क्या यह H-1B का विकल्प बन सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि K-Visa विदेशी प्रतिभाओं को आकर्षित करने में कारगर हो सकता है, लेकिन यह सीधे तौर पर H-1B वीजा का विकल्प नहीं है।
H-1B वीजा में कड़ी शैक्षणिक योग्यता, कार्य अनुभव और न्यूनतम वेतन जैसी शर्तें होती हैं।
K-Visa अपेक्षाकृत अधिक लचीला है और खासकर विदेश में बसे चीनी मूल के युवाओं व स्टार्टअप्स को आकर्षित करेगा।
H-1B वीजा के अधिकांश आवेदक भारतीय होते हैं, इसलिए K-Visa का प्रभाव सीमित रह सकता है।

निष्कर्ष
चीन का K-Visa निश्चित रूप से दुनिया की वैज्ञानिक और तकनीकी प्रतिभाओं को अपनी ओर खींचने का एक प्रयास है। हालांकि, इसे अमेरिका के H-1B वीजा का सीधा विकल्प कहना अभी जल्दबाज़ी होगी।