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शहीद सूबेदार की बुजुर्ग मां और बेटी सदमे में: सिरसा घर पर दूसरे दिन भी जमावड़ा, बच्चों की परवरिश की चिंता में मांl

22/April/2025 Fact Recorder

सिरसा में शहीद सूबेदार बलदेव सिंह के घर पर मौजूद परिवार व रिश्तेदार।

सिरसा में शहीद सूबेदार बलदेव सिंह के घर पर दूसरे दिन भी जमावड़ा लगा रहा। लोग शहीद के घर पर शहादत को नमन करने पहुंचे रहे हैं और कुछ रिश्तेदार भी परिवार के साथ रात से ठहरे हुए हैं। हर किसी में एक ही चर्चा है कि बलदेव चंगा बंदा सी, गलत होया ये। गांव के शहीद सूबेदार बलदेव सिंह।

बच्चों की पढ़ाई के लिए सूबेदार ने छोड़ा था गांव जानकारी के अनुसार शहीद सूबेदार ने बच्चों की पढाई के लिए उन्होंने गांव छोड़ दिया था। करीब 10 साल पहले वह अपने परिवार के साथ गांव से सिरसा के मीरपुर कालोनी में आकर रहने लगे थे। उनके साथ पूरा परिवार रहता था, ताकि बच्चों की पढाई ठीक से कराई जा सकें। आज भी झोपड़ा में पुश्तैनी मकान, जमीन आदि वहीं पर है। इसलिए गांव में अंतिम संस्कार किया गया।शहीद सूबेदार बलदेव सिंह की मां रचना कौर को धैर्य बंधाती हुई महिला।

परिवार में कौन-कौन

शहीद सूबेदार के पिता बलवंत सिंह का निधन हो चुका है। घर में मां रचना कौर, भाई हरदेव सिंह, पत्नी गुरविंदर कौर और 2 बच्चे हैं, जिनमें बड़ा बेटा उपराज सिंह व बेटी मनरीत कौर है। बेटा सातवीं उनके परिवार के मुताबिक सूबेदार बलदेव सिंह जम्मू एंड कश्मीर (JAK) राइफल्स में थे। पिछले साल ही उन्हें सूबेदार के पद पर प्रमोशन मिली थी। सूबेदार बलदेव सिंह 24 साल पहले मार्च 2001 में JAK राइफल्स की 18वीं रेजिमेंट में सिपाही के तौर पर भर्ती हुए थे। पिछले साल ही उन्हें पदोन्नति मिली थी। इसके बाद वह सूबेदार बन गए।

कुमार पोस्ट पर तबीयत बिगड़ी सूबेदार बलदेव सिंह की ड्यूटी लद्दाख में सियाचिन के नॉर्थ ग्लेशियर में कुमार पोस्ट पर थी। वह शनिवार रात को ठीक सोए थे। जब रविवार सुबह उठे तो उनकी तबीयत खराब हुई। पहले जवान को उल्टी हुई। इसके बाद उन्होंने बताया कि घबराहट हो रही है। सोमवार शाम को सैन्य अधिकारी उनका पार्थि देह लेकर सिरसा पहुचे थे।