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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की जुवेनाइल जस्टिस निगरानी समिति के निर्देश पर पंजाब पुलिस ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 पर प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया। डीजीपी कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन, पंजाब के कार्यालय ने एनजीओ बचपन बचाओ आंदोलन के सहयोग से राज्यभर में यह सत्र कराए। इससे पहले फरीदकोट, पटियाला, लुधियाना, जालंधर और बॉर्डर रेंज के अलावा लुधियाना और जालंधर कमिश्नरेट में भी प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
यह सत्र बच्चों से जुड़े मामलों को संभालने वाले पुलिस अधिकारियों के लिए आयोजित किए गए। पहले दिन 24 मार्च को डीजीपी गुरप्रीत दियो, आईपीएस ने उद्घाटन किया। नाबालिगों की बढ़ती आपराधिक संलिप्तता, समाज में उनके पुनर्वास, बच्चों के प्रति संवेदनशीलता और पीड़ितों के लिए मुआवजा योजनाओं पर चर्चा हुई। दूसरे दिन 25 मार्च को पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर, आईपीएस ने प्रतिभागियों से संवाद किया। समापन एडीसीपी हेडक्वार्टर अमृतसर, हरकमल कौर ने किया। बचपन बचाओ आंदोलन के प्रतिनिधि डॉ. कविता सुरभी और बाबन प्रकाश के साथ डॉ. छाया प्रसाद, क्लीनिकल डायरेक्टर, आशा, चाइल्ड केयर एंड डेवलपमेंट क्लिनिक, चंडीगढ़ ने जेजे एक्ट के प्रावधानों, देखभाल और सुरक्षा की जरूरत वाले बच्चों से जुड़े संशोधनों और पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों पर अधिकारियों से चर्चा की।
ऐतिहासिक फैसलों और केस स्टडीज पर विचार-विमर्श हुआ। डॉ. कविता सुरभी और बाबन प्रकाश ने “जेजे एक्ट के तहत अपनाई जाने वाली प्रक्रियाएं और जांच के दौरान आने वाली चुनौतियां’ विषय पर प्रस्तुति दी। पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह, आईपीएस और एडीसीपी हेडक्वार्टर हरकमल कौर ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल अधिकारियों का धन्यवाद किया।











