2 अप्रैल, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Himachal Desk: हिमाचल प्रदेश के Chamba में बुधवार को मजदूर संगठनों ने चार नए लेबर कोड के विरोध में ‘काला दिवस’ मनाया। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर CITU के बैनर तले श्रमिकों ने विभिन्न कार्यस्थलों पर काली पट्टी और काले बिल्ले पहनकर विरोध जताया।
क्या हैं मजदूरों की आपत्तियां?
मजदूर नेताओं का कहना है कि नए लेबर कोड लागू होने से श्रमिकों के अधिकार कमजोर होंगे।
- करीब 70% उद्योग और 74% मजदूर श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो सकते हैं
- हड़ताल करने पर कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान
- स्थायी नौकरी की जगह ठेका और फिक्स टर्म रोजगार को बढ़ावा
- काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 किए जाने का खतरा
मजदूर संगठनों ने आरोप लगाया कि इससे “बंधुआ मजदूरी” जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
नेताओं ने क्या कहा?
यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि ये श्रम संहिताएं दशकों की लड़ाई से मिले अधिकारों को कमजोर करती हैं। उनका मानना है कि इससे
- नौकरी की सुरक्षा घटेगी
- वेतन और सामाजिक सुरक्षा प्रभावित होगी
- ट्रेड यूनियन के अधिकार सीमित हो जाएंगे
क्या हैं प्रमुख मांगें?
प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों ने सरकार से मांग की कि:
- चारों लेबर कोड तुरंत वापस लिए जाएं
- मौजूदा श्रम कानूनों को मजबूत किया जाए
- राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम वेतन सुनिश्चित हो
- ठेका प्रथा पर नियंत्रण लगाया जाए
- सभी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा मिले
👉 कुल मिलाकर, Chamba में हुआ यह प्रदर्शन देशभर में श्रम कानूनों को लेकर बढ़ती असंतोष की भावना को दर्शाता है।













