ESR टेस्ट क्यों जरूरी होता है? इंफेक्शन में बढ़ने-घटने के क्या संकेत देता है ये ब्लड टेस्ट

ESR टेस्ट क्यों जरूरी होता है? इंफेक्शन में बढ़ने-घटने के क्या संकेत देता है ये ब्लड टेस्ट

10 दिसंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

Health Desk:  ESR यानी एरिथ्रोसाइट सेडीमेंटेशन रेट एक सामान्य लेकिन बेहद अहम ब्लड टेस्ट है, जिसे डॉक्टर अक्सर इंफेक्शन, सूजन या लंबे समय से चल रही बीमारी की आशंका में करवाने की सलाह देते हैं। यह टेस्ट खून में मौजूद रेड ब्लड सेल्स के नीचे बैठने की गति को मापता है और शरीर के अंदर हो रहे बदलावों का संकेत देता है। ESR किसी खास बीमारी की पहचान नहीं करता, लेकिन यह बताता है कि शरीर में कहीं न कहीं सूजन या असामान्य प्रक्रिया चल रही है।

एम्स दिल्ली के रेडियोलॉजी विभाग के पूर्व विशेषज्ञ डॉ. सुन्नकर दत्त के अनुसार, जब शरीर में बैक्टीरियल या वायरल इंफेक्शन, ऑटोइम्यून डिजीज, चोट या सूजन होती है, तो खून में कुछ प्रोटीन बढ़ जाते हैं। ये प्रोटीन रेड ब्लड सेल्स को आपस में चिपका देते हैं, जिससे वे तेजी से नीचे बैठती हैं और ESR का स्तर बढ़ जाता है। यही वजह है कि लंबे समय तक बुखार, जोड़ों में दर्द, कमजोरी या इंफेक्शन की स्थिति में यह टेस्ट कराया जाता है।

ESR टेस्ट के लिए खून का सैंपल एक पतली ट्यूब में रखा जाता है और एक घंटे बाद यह देखा जाता है कि रेड ब्लड सेल्स कितनी नीचे तक पहुंची हैं। अगर ESR ज्यादा है, तो यह शरीर में सूजन, संक्रमण, टिश्यू डैमेज या किसी ऑटोइम्यून समस्या की ओर इशारा करता है। वहीं, ESR का कम होना आमतौर पर सामान्य माना जाता है, हालांकि डिहाइड्रेशन या कुछ दवाओं के कारण भी यह घट सकता है।

डॉक्टर इस टेस्ट के जरिए यह तय करते हैं कि आगे कौन-सी जांच जरूरी है। इसलिए ESR रिपोर्ट को खुद समझने या नतीजा निकालने के बजाय डॉक्टर को दिखाना जरूरी होता है। टेस्ट से पहले ली जा रही दवाओं की जानकारी देना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही जांच कराना बेहतर रहता है।