Uttar Pradesh में गेहूं खरीद का महा-अभियान: ₹2585 एमएसपी के साथ 50 लाख टन खरीद का लक्ष्य

24 मार्च 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

National Desk:  उत्तर प्रदेश सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं की सरकारी खरीद की तैयारी तेज कर दी है। राज्य में गेहूं की खरीद 30 मार्च से 15 जून तक की जाएगी। इस बार गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 160 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। पिछले वर्ष जहां एमएसपी 2425 रुपये प्रति क्विंटल था, वहीं इस बार किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जाएगा।

कैबिनेट बैठक में गेहूं क्रय नीति को मंजूरी मिलने के बाद कृषि मंत्री Surya Pratap Shahi ने बताया कि इस बार सरकार ने 50 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य तय किया है। खरीद प्रक्रिया के लिए खाद्य एवं रसद विभाग सहित आठ क्रय एजेंसियों के माध्यम से राज्य भर में करीब 6500 क्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों पर सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक खरीद की जाएगी और किसानों की सुविधा के लिए छाया, पानी और बैठने की व्यवस्था भी की जाएगी।

सरकार ने किसानों को अतिरिक्त राहत देते हुए क्रय केंद्रों पर गेहूं की उतराई, छनाई और सफाई के लिए 20 रुपये प्रति क्विंटल अलग से देने का प्रावधान किया है। कृषि मंत्री ने बताया कि विभाग ने शुरुआत में 30 लाख टन खरीद का प्रस्ताव रखा था, लेकिन मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के निर्देश पर लक्ष्य बढ़ाकर 50 लाख टन कर दिया गया। साथ ही किसानों को गेहूं का भुगतान डीबीटी के माध्यम से 48 घंटे के भीतर करने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार ने बिचौलियों की भूमिका खत्म करने के लिए पूरी खरीद प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है। खाद्य एवं रसद विभाग के अनुसार सोमवार तक 1,95,628 किसानों ने गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण करा लिया है, जबकि 2829 क्रय केंद्र पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं। इस बार कृषि उत्पादक संगठनों (FPO) और कृषि उत्पादक कंपनियों (FPC) को भी क्रय एजेंसियों के माध्यम से खरीद की अनुमति दी गई है, बशर्ते उनका पंजीकरण कम से कम एक वर्ष पुराना हो और खाते में 20 लाख रुपये की राशि हो।

इसके अलावा सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान खरीद के दौरान सामने आई जूट बोरों की कमी को दूर करने के लिए भी कदम उठाए हैं। कैबिनेट ने भारत सरकार से मिले आवंटन के अनुसार 87 हजार गांठ जूट बोरे खरीदने के लिए अतिरिक्त धनराशि को मंजूरी दी है, जिससे धान और कस्टम मिल्ड राइस की आपूर्ति में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सकेगा।