विराट कोहली ने लिया संन्यास: हमेशा हार न मानने वाला खिलाड़ी

12 मई, 2025 Fact Recorder

विराट कोहली का टेस्ट संन्यास: एक युग का शांत अंत

कुछ ही दिनों पहले जब रोहित शर्मा ने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहा, तो अब विराट कोहली ने भी इसी राह पर चलते हुए इंग्लैंड दौरे से पहले ही संन्यास का ऐलान कर दिया। क्या यह अचानक लिया गया फैसला था या लंबे समय से अंदर ही अंदर चल रही उथल-पुथल का नतीजा?

36 वर्षीय विराट कोहली ने सोशल मीडिया पर लिखा:
“शांत मेहनत, लंबे दिन, वो छोटे पल जो कोई नहीं देखता लेकिन जो हमेशा आपके साथ रहते हैं। इस फॉर्मेट से हटना आसान नहीं, लेकिन सही लगता है। मैंने इसे सब कुछ दिया, और इसने मुझे उससे कहीं ज़्यादा लौटाया।”

इंग्लैंड में पाँच टेस्ट का सामना करना, उस खिलाड़ी के लिए मुश्किल हो सकता था जो हाल ही में अपनी फॉर्म के लिए संघर्ष कर रहा था। ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पिछली सीरीज़ में वह सात बार ऑफ-स्टंप से बाहर की गेंद पर आउट हुआ था। शायद यह आत्ममंथन और थकान का ही परिणाम था, कि कोहली ने पहली बार वो कदम उठाया जो उनके दृढ़ निश्चय वाले करियर से मेल नहीं खाता।

लेकिन कोहली को इस फैसले के लिए कठोरता से नहीं आँका जा सकता। उनका करियर असाधारण रहा है, और उनके योगदान को आने वाली पीढ़ियाँ याद रखेंगी।

उनके करियर की शुरुआत 2006 में पिता की मृत्यु के दिन रणजी मैच खेलने से हुई थी, और वहीं से उन्होंने दिखा दिया था कि यह लड़का अलग है। 2008 में अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतने के बाद टीम इंडिया में जगह पक्की की, लेकिन एक समय वह ‘कूल लाइफ’ में भटक भी गए। तब उन्होंने खुद को बदला—डाइट, फिटनेस और सोच सब कुछ। भूखे रहकर भी उन्होंने हार नहीं मानी। 2014 में इंग्लैंड दौरे पर विफलता के बाद खुद पर संदेह किया, लेकिन सचिन तेंदुलकर की मदद से वापसी की। उसके बाद कोहली ने टेस्ट, वनडे और टी20 में रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बनाए। पर कोविड काल के बाद उनका आत्मविश्वास और पहचान दोनों डगमगाए। “मैं कौन हूँ?” यह सवाल उन्हें परेशान करने लगा।

हाल ही में उन्होंने कहा था, “अब क्रिकेट मेरे लिए सिर्फ़ गेंद को हिट करने तक सीमित रह गया है।” शायद यही सादगी अब उन्हें रास आ रही थी, जबकि टेस्ट क्रिकेट फिर से उन्हें “किसी बनने और उम्मीदों से जूझने” की ओर खींच रहा था। उन्होंने कभी हार नहीं मानी, लेकिन हर महान कहानी का अंत होता है। विराट कोहली ने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहा है, लेकिन क्रिकेट से उनका रिश्ता अभी खत्म नहीं हुआ। वनडे और टी20 में वह अब भी भारत के लिए योगदान देते रहेंगे।

यह संन्यास एक अंत नहीं, बल्कि एक नए अध्याय की शुरुआत है।