US: भारतीय नागरिक को अमेरिका में 30 महीने की जेल, रूस को अवैध रूप से हवाई उपकरण भेजने का दोषी करार

17 January 2026 Fact Recorder

International Desk:  अमेरिका की एक संघीय अदालत ने एक भारतीय नागरिक को ढाई साल (30 महीने) की जेल की सजा सुनाई है। उस पर आरोप है कि उसने ऐसे हवाई और एयरोस्पेस उपकरणों को अवैध रूप से रूस भेजने की साजिश रची, जिनके निर्यात के लिए अमेरिकी सरकार से विशेष लाइसेंस जरूरी होता है।

ओरेगन डिस्ट्रिक्ट की अदालत में सुनवाई के दौरान अमेरिकी अटॉर्नी स्कॉट ब्रैडफोर्ड ने बताया कि आरोपी संजय कौशिक (58 वर्ष) ने यह साजिश जानबूझकर और मुनाफे के उद्देश्य से रची। कौशिक दिल्ली का निवासी बताया गया है।

क्या हैं आरोप?
अमेरिकी अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह एक पूर्व नियोजित अंतरराष्ट्रीय साजिश थी, जिसमें विदेशी सहयोगियों और रूस की प्रतिबंधित कंपनियों की संलिप्तता सामने आई है। आरोप है कि कौशिक ने बार-बार अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े सुरक्षा नियमों को कमजोर करने की कोशिश की।

कोर्ट ने पाया कि आरोपी ने Export Control Reform Act का उल्लंघन किया है। इसके तहत उसे:

  • 30 महीने की फेडरल जेल, और

  • 36 महीने की सुपरवाइज्ड रिहाई की सजा सुनाई गई है।

सरकार का सख्त रुख
राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के सहायक अटॉर्नी जनरल जॉन आइजनबर्ग ने कहा,
“जो लोग अमेरिकी एक्सपोर्ट कंट्रोल कानूनों को दरकिनार करने की कोशिश करते हैं, खासकर जब मामला सैन्य उपयोग की तकनीक से जुड़ा हो, उनके खिलाफ कानून पूरी सख्ती से लागू किया जाएगा।”

कैसे रची गई साजिश?
कोर्ट दस्तावेजों के अनुसार, सितंबर 2023 में कौशिक ने रूस की कंपनियों के लिए अमेरिका से गैरकानूनी तरीके से एयरोस्पेस पार्ट्स और तकनीक हासिल करने की योजना बनाई।

इस साजिश के तहत, कौशिक और उसके साथियों ने ओरेगन स्थित एक सप्लायर से AHRS (Attitude and Heading Reference System) खरीदा। यह सिस्टम विमान के नेविगेशन और फ्लाइट कंट्रोल डेटा के लिए बेहद अहम होता है।

न्याय विभाग के अनुसार, AHRS जैसे उपकरणों को रूस जैसे देशों में निर्यात करने के लिए वाणिज्य विभाग से विशेष लाइसेंस जरूरी होता है। हालांकि, यह उपकरण इस बहाने खरीदे गए कि वे कौशिक और उसकी भारतीय कंपनी के उपयोग के लिए हैं, जबकि असल में इन्हें रूस के अंतिम उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाया जाना था।

निष्कर्ष:
यह मामला अमेरिकी निर्यात नियंत्रण कानूनों के उल्लंघन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर खतरों को उजागर करता है। अमेरिकी प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि ऐसे मामलों में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी