13 नवंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
International Desk: अमेरिका ने ईरान के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम पर कसा शिकंजा, भारत की एक कंपनी समेत 7 देशों के 32 व्यक्तियों और संस्थाओं पर लगाया प्रतिबंध अमेरिका ने ईरान के मिसाइल और यूएवी (UAV) कार्यक्रमों को समर्थन देने वाले 32 व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं। इन प्रतिबंधों की सूची में भारत की एक कंपनी भी शामिल है। यह कदम ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने और उसकी अस्थिर करने वाली गतिविधियों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि यह कार्रवाई 27 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा ईरान पर फिर से लागू किए गए प्रतिबंधों का समर्थन करती है। जिन देशों की कंपनियां और व्यक्ति इसमें शामिल हैं, उनमें ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), तुर्की, चीन, हांगकांग, भारत, जर्मनी और यूक्रेन शामिल हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, ये नेटवर्क मध्य पूर्व में अमेरिकी और सहयोगी कर्मियों के साथ-साथ लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करते हैं। अमेरिका ने कहा कि वह ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और यूएवी कार्यक्रमों से जुड़े सामान और तकनीक की खरीद को रोकने के लिए तीसरे देशों में स्थित संस्थाओं पर भी कार्रवाई जारी रखेगा।
अमेरिकी वित्तीय खुफिया के उपसचिव जॉन के. हर्ले ने बताया कि ईरान वैश्विक वित्तीय प्रणालियों का दुरुपयोग करके धन शोधन, हथियारों के घटकों की खरीद और आतंकवादी समूहों को सहायता पहुंचा रहा है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर अमेरिका ईरान पर “अधिकतम दबाव” की नीति अपना रहा है ताकि उसे परमाणु हथियार विकसित करने से रोका जा सके। अमेरिका चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी संयुक्त राष्ट्र द्वारा दोबारा लगाए गए प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करे, जिससे ईरान की वैश्विक वित्तीय प्रणाली तक पहुंच बंद हो सके।
यह कार्रवाई नेशनल सिक्योरिटी प्रेसिडेंशियल मेमोरेंडम-2 के तहत की गई है, जिसके तहत अमेरिका ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को रोकने, उसके पारंपरिक हथियारों के विकास पर लगाम लगाने और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) को संसाधनों से वंचित करने का प्रयास कर रहा है।
अमेरिका ने भारत स्थित Farmlane Private Limited को भी प्रतिबंधित कंपनियों में शामिल किया है, जिस पर आरोप है कि उसने यूएई की कंपनी Marco Klinge के माध्यम से सोडियम क्लोरेट और सोडियम पर्क्लोरेट जैसी सामग्रियों की खरीद में सहायता की थी।













