24 नवंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
Education Desk: उत्तर प्रदेश के भदोही में पुलिस ने उस गिरोह का पर्दाफाश किया है जो फर्जी “स्वतंत्रता सेनानी परिवार” प्रमाणपत्र बनवाकर छात्रों को मेडिकल कॉलेजों में MBBS में दाखिला दिला रहा था। पुलिस ने इस गिरोह के एक महत्वपूर्ण सदस्य शुभम सिंह (27) को गिरफ्तार किया है। शुभम मिर्जापुर के जिगना का निवासी है और गाज़ीपुर के जमानिया स्थित सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में लैब टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत था।
पुलिस ने उसे ग्यानपुर क्षेत्र से उस समय पकड़ा जब वह एक एमबीबीएस छात्र से पहली किस्त के रूप में ली जाने वाली राशि प्राप्त करने पहुंचा था। उसके पास से 4.8 लाख रुपये बरामद हुए, जो कि दिव्यांशु वर्मा नामक छात्र के पिता द्वारा दी जाने वाली पाँच लाख रुपये की आरंभिक राशि का हिस्सा था। कुल 15 लाख रुपये में एडमिशन कराने की डील तय की गई थी।
मामला तब सामने आया जब 27 अगस्त 2025 को चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशक ने भदोही जिले के नौ छात्रों के 2012–13 सत्र में स्वतंत्रता सेनानी कोटे से हुए MBBS प्रवेश की जांच पुलिस से कराई। छात्रों—शंभवी आर्या, दिव्यांशु वर्मा, सेजल सिंह, शिवांश यादव, अन्वी भूषण, अमित श्रीवास्तव, आयतुझ्जहरा, ईशा यादव और दीपिका आर्या—द्वारा जमा किए गए प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए।
जिलाधिकारी कार्यालय की जांच में यह स्पष्ट हो गया कि नौ में से किसी भी प्रमाणपत्र को आधिकारिक रूप से जारी नहीं किया गया था, यानी सभी प्रमाणपत्र फर्जी थे। इसके बाद शाहिद अली नामक क्लर्क की शिकायत पर 20 सितंबर 2025 को भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई।
जांच के दौरान दिव्यांशु वर्मा ने बताया कि शुभम और उसके साथी प्रदीप दुबे ने उसकी NEET-2025 की प्रवेश प्रक्रिया में मदद के नाम पर फर्जी प्रमाणपत्र बनवाया था तथा उसके पिता—जमानिया स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डॉ. घनश्याम वर्मा—से 15 लाख रुपये की मांग की थी।
रविवार को तय भुगतान लेने पहुंचे शुभम को सिंहपुर नहर पुल के पास धर दबोचा गया। पूछताछ में उसने अपनी संलिप्तता स्वीकार की और बताया कि इस पूरे नेटवर्क में कई अन्य लोग भी शामिल हैं। पुलिस अब उसके सहयोगियों की तलाश में जुटी है। शुभम को सोमवार को अदालत में पेश किया जाएगा।













