08 January 2026 Fact Recorder
Business Desk: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों के खिलाफ सख्त आर्थिक कार्रवाई की तैयारी कर ली है। इस कदम का सीधा असर भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर पड़ सकता है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने दावा किया है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले एक द्विदलीय विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिसका मकसद यूक्रेन युद्ध के बीच “पुतिन की युद्ध मशीन को फ्यूल देने” वाले देशों पर भारी आर्थिक दबाव बनाना है।
विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्रस्तावित कानून रूस से जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं के साथ-साथ उन देशों को भी निशाना बनाता है, जो रियायती दरों पर रूसी कच्चा तेल खरीद रहे हैं। ग्राहम के अनुसार, इस विधेयक पर अगले सप्ताह अमेरिकी संसद में द्विदलीय मतदान हो सकता है।
रूस प्रतिबंध विधेयक को ट्रंप की मंजूरी
सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने X (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी दी कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बैठक की, जिसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। ग्राहम ने कहा कि ट्रंप ने “रूस पर प्रतिबंध अधिनियम 2025” को हरी झंडी दे दी है, जिस पर वे सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल समेत कई सांसदों के साथ महीनों से काम कर रहे थे।
ग्राहम का कहना है कि यह कानून ऐसे समय में लाया जा रहा है जब यूक्रेन शांति की दिशा में कुछ रियायतें देने को तैयार है, जबकि रूस लगातार सैन्य कार्रवाई जारी रखे हुए है। इस विधेयक से राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों पर “अत्यधिक दबाव” बनाने का अधिकार मिलेगा, जो सस्ते रूसी तेल की खरीद के जरिए रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को समर्थन दे रहे हैं।
क्या है ‘रूस पर प्रतिबंध अधिनियम 2025’?
अमेरिकी कांग्रेस की वेबसाइट के अनुसार, इस विधेयक का औपचारिक नाम “Russia Sanctions Act 2025” है। इसके तहत रूस से जुड़े कारोबार पर व्यापक दंडात्मक प्रावधान प्रस्तावित हैं। सबसे कड़े प्रावधानों में रूस से अमेरिका में आयात होने वाली सभी वस्तुओं और सेवाओं पर उनकी कीमत के कम से कम 500 फीसदी तक शुल्क (टैरिफ) लगाने की बात शामिल है। यह प्रावधान अप्रत्यक्ष रूप से उन देशों को भी प्रभावित कर सकता है, जो रूस के साथ ऊर्जा व्यापार जारी रखे हुए हैं।
भारत को लेकर ट्रंप का दावा
इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप यह दावा कर चुके हैं कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद के चलते अमेरिकी टैरिफ बढ़ाए गए, जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नाखुश हैं। हाउस रिपब्लिकन पार्टी की एक बैठक में ट्रंप ने कहा था कि मोदी के साथ उनके संबंध अच्छे हैं, लेकिन टैरिफ का मुद्दा दोनों देशों के बीच तनाव पैदा कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर भारत ने रूसी तेल आयात पर अमेरिका की चिंताओं को दूर नहीं किया, तो टैरिफ और बढ़ाए जा सकते हैं।
भारत ने किया ट्रंप के दावे का खंडन
हालांकि, भारत सरकार पहले ही ट्रंप के इस दावे को खारिज कर चुकी है कि प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी तेल खरीद बंद करने का कोई वादा किया था। नई दिल्ली ने साफ किया है कि भारत के ऊर्जा फैसले राष्ट्रीय हितों के आधार पर लिए जाते हैं, खासकर ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिकी संसद में यह विधेयक किस रूप में पारित होता है और इसका भारत-अमेरिका संबंधों तथा वैश्विक ऊर्जा बाजार पर क्या असर पड़ता है।













