27 अगस्त 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
Business Desk: ट्रंप का 50% टैरिफ: भारत के निर्यात पर बड़ा झटका, 15 लाख नौकरियों पर संकट, सरकार के सामने बड़ी चुनौती अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50% तक का अतिरिक्त टैरिफ लगाने के फैसले से भारत की विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं को तगड़ा झटका लगने वाला है। बुधवार से लागू हुए इस टैरिफ के दायरे में भारत से अमेरिका को होने वाले 48.2 अरब डॉलर के निर्यात पर सीधा असर पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत के वस्त्र, परिधान, रत्न-आभूषण, जूते-चप्पल, चमड़ा, पशु उत्पाद, रसायन और ऑटो पार्ट्स उद्योग पर गहरा संकट आएगा।
रोजगार पर सीधा असर, उत्पादन ठप होने का खतरा
वोंटोबेल में ईएम इक्विटीज के सह-प्रमुख राफेल लुएशर ने चेतावनी दी है कि यह टैरिफ भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की विकास योजनाओं को कमजोर कर देगा। कपड़ा, जूते, आभूषण और ऑटो पार्ट्स सेक्टर में अगले 12 महीनों में 10-15 लाख नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। अकेले कपड़ा क्षेत्र में एक लाख से ज्यादा रोजगार और सूरत-मुंबई के रत्न-आभूषण उद्योग में एक लाख नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है।
प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकता है भारत
भारत अमेरिका को हर साल 10.3 अरब डॉलर का कपड़ा और 12 अरब डॉलर का रत्न-आभूषण निर्यात करता है। बढ़े हुए टैरिफ के चलते भारतीय परिधान अब अमेरिकी बाजार में बांग्लादेश और वियतनाम (जहां केवल 20% टैरिफ है) से महंगे हो जाएंगे। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) के अनुसार, तिरुपुर, नोएडा और सूरत के कई कपड़ा निर्माताओं ने पहले ही उत्पादन रोक दिया है। इसी तरह, उच्च टैरिफ से हस्तनिर्मित आभूषणों के निर्यात में भारी गिरावट आने की आशंका है।
कंपनियों और शेयर बाजार पर दबाव
निर्यातकों के ऑर्डर रद्द होने लगे हैं। अमेरिकी आयातक कपड़ा, ऑटो पार्ट्स, रत्न-आभूषण और समुद्री उत्पादों के ऑर्डर वापस ले रहे हैं, जिससे उत्पादन ठप होने, इन्वेंट्री जमा होने और कार्यशील पूंजी की समस्या गहराने का खतरा है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली से सेंसेक्स 849 अंक और निफ्टी 255 अंक टूट गया है। मूडीज, नोमुरा और सिटीग्रुप ने भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 6.5% से नीचे कर दिया है, जबकि फिच रेटिंग्स ने 2025-26 के लिए अनुमान 6.4% से घटाकर 6.3% कर दिया है।
सरकार के सामने चुनौती और विकल्प
इस संकट से निपटने के लिए सरकार को व्यापक कदम उठाने होंगे। संभावित विकल्पों में अमेरिकी कृषि, व्हिस्की, मेडिकल डिवाइस और ऊर्जा उत्पादों पर जवाबी टैरिफ, प्रभावित निर्यातकों को प्रोत्साहन, नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के जरिये बाजार विविधीकरण और अमेरिकी आयात बढ़ाकर कूटनीतिक समाधान तलाशना शामिल है। हालांकि, अमेरिका का भारत को निर्यात मात्र 45 अरब डॉलर का है, इसलिए जवाबी कार्रवाई का असर सीमित रहेगा।
एपल का भरोसा बरकरार
ट्रंप की चेतावनियों के बावजूद टेक दिग्गज एपल ने भारत में अपने विस्तार को जारी रखने का फैसला किया है। कंपनी भारत में आईफोन उत्पादन क्षमता सालाना 4 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ करने के लिए 2.5 अरब डॉलर का निवेश करेगी। भारत से निर्यात होने वाले अधिकांश आईफोन अब अमेरिका में बेचे जा रहे हैं, और कंपनी भारत को वैश्विक उत्पादन हब बनाने की दिशा में तेजी से बढ़ रही है।
निष्कर्ष
ट्रंप का यह टैरिफ न केवल भारत के निर्यात उद्योग बल्कि उसकी वैश्विक विनिर्माण हब बनने की महत्वाकांक्षा को भी चुनौती दे रहा है। यदि सरकार समय पर ठोस कदम नहीं उठाती, तो इसका असर रोजगार, निवेश, शेयर बाजार और आर्थिक विकास पर गहरा पड़ सकता है।