शिशु की मालिश का पारंपरिक लाल तेल: जानिए इसमें कौन-कौन सी जड़ी-बूटियां होती हैं और उनके फायदे

26 मार्च 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Lifestyle Desk : आयुर्वेद के अनुसार नवजात शिशु की त्वचा बेहद कोमल होती है, इसलिए उसकी देखभाल के लिए प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल सबसे बेहतर माना जाता है। इसी वजह से शिशु की मालिश के लिए पारंपरिक “लाल तेल” आज भी काफी लोकप्रिय है। यह तेल कई औषधीय जड़ी-बूटियों और तिल के तेल से मिलकर बनाया जाता है, जो बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास में मदद करता है।

लाल तेल में मिलाई जाने वाली मुख्य जड़ी-बूटियां

1. शंखपुष्पी
शंखपुष्पी को आयुर्वेद में दिमाग के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और पोषक तत्व शिशु के मानसिक विकास को बढ़ाते हैं, साथ ही नर्वस सिस्टम को शांत रखकर अच्छी नींद में मदद करते हैं।

2. माष (उड़द दाल)
उड़द दाल प्रोटीन, कैल्शियम और आयरन से भरपूर होती है। यह शिशु की हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करती है और शरीर को ताकत देती है।

3. रतनजोत
रतनजोत इस तेल को लाल रंग देने के साथ-साथ औषधीय गुण भी प्रदान करता है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो त्वचा को संक्रमण से बचाते हैं और मुलायम बनाए रखते हैं।

4. कर्पूर (कपूर)
कपूर में एंटीसेप्टिक और ठंडक देने वाले गुण होते हैं। यह ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करता है, सर्दी-जुकाम से बचाव में मदद करता है और हल्के दर्द को कम करने में सहायक होता है।

5. तिल का तेल
तिल का तेल इस मिश्रण का आधार होता है। इसमें विटामिन E, ओमेगा फैटी एसिड्स और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो त्वचा को पोषण देते हैं, नमी बनाए रखते हैं और शरीर को गर्माहट प्रदान करते हैं।

लाल तेल से मालिश के फायदे

  • शिशु की त्वचा को मुलायम और हेल्दी बनाता है
  • हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत करता है
  • ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करता है
  • अच्छी नींद में मदद करता है
  • सर्दी-खांसी से बचाव में सहायक

नियमित रूप से सही तरीके से लाल तेल से मालिश करने पर शिशु के संपूर्ण विकास में मदद मिलती है। हालांकि, किसी भी नए तेल का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर होता है, खासकर यदि बच्चे की त्वचा संवेदनशील हो।