08 अगस्त 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
Rashifal Desk: आज का पंचांग 8 अगस्त 2025: सावन पूर्णिमा के साथ वरलक्ष्मी व्रत का शुभ योग, जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूजा विधि
आज शुक्रवार, 8 अगस्त 2025 को सावन पूर्णिमा और वरलक्ष्मी व्रत का पावन संयोग बन रहा है। यह दिन मां लक्ष्मी के वरदायी स्वरूप ‘वरलक्ष्मी’ को समर्पित होता है। महिलाएं इस दिन सुख-समृद्धि, सौभाग्य और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना के लिए व्रत करती हैं। पंचांग के अनुसार आज दिन भर कई शुभ योग भी बन रहे हैं। आइए जानें आज का संपूर्ण पंचांग, शुभ-अशुभ मुहूर्त और व्रत की विधि।
आज का पंचांग (8 अगस्त 2025)
वार: शुक्रवार
मास: श्रावण (सावन), शुक्ल पक्ष
तिथि: चतुर्दशी – दोपहर 2:12 बजे तक
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा – दोपहर 2:28 बजे तक
योग: आयुष्मान – 9 अगस्त, सुबह 4:09 बजे तक
करण:
वणिज – दोपहर 2:12 बजे तक
विष्टि – रात 1:52 बजे तक (9 अगस्त)
सूर्य राशि: कर्क
चंद्र राशि: मकर
सूर्योदय-सूर्यास्त एवं चंद्रोदय
सूर्योदय: सुबह 5:46 बजे
सूर्यास्त: शाम 7:07 बजे
चंद्रोदय: शाम 6:42 बजे
चंद्रास्त: सुबह 5:28 बजे (9 अगस्त)
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 से 12:53 तक
अमृत काल:
सुबह 7:57 से 9:35 बजे तक
9 अगस्त को प्रातः 4:01 से 5:37 बजे तक
अशुभ समय
राहुकाल: सुबह 10:47 से दोपहर 12:27 तक
गुलिक काल: सुबह 7:26 से 9:06 तक
यमगंड काल: दोपहर 3:47 से शाम 5:27 तक
नक्षत्र विशेष – उत्तराषाढ़ा
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र वाले जातक परिश्रमी, धैर्यवान, दूरदर्शी और ईमानदार होते हैं। इसका प्रतीक हाथी का दांत या छोटा बिस्तर होता है। इसके स्वामी सूर्य हैं और देवता विश्वदेव, जो अजेय विजय के प्रतीक माने जाते हैं।
वरलक्ष्मी व्रत का महत्व
वरलक्ष्मी व्रत सावन मास के शुक्ल पक्ष के शुक्रवार को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से अष्टलक्ष्मी – धनलक्ष्मी, सौभाग्यलक्ष्मी, विद्या लक्ष्मी, विजयलक्ष्मी आदि की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
व्रत व पूजा विधि
प्रातः स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और मां लक्ष्मी की प्रतिमा या कलश स्थापित करें।
कलश में जल, अक्षत, सुपारी, सिक्के और पांच प्रकार के पत्ते डालें।
कलश के ऊपर लाल वस्त्र और नारियल रखें, स्वास्तिक बनाएं।
मां लक्ष्मी को चूड़ियां, सिंदूर, वस्त्र, फूल, फल और मिठाई अर्पित करें।
‘ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’ मंत्र का जाप करें या लक्ष्मी स्तोत्र, श्रीसूक्त, कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।
महिलाएं ‘चरणकमल बंदी’ (राखी के समान) हाथ में बांधती हैं और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करती हैं।
निष्कर्ष
आज का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ है। सावन पूर्णिमा और वरलक्ष्मी व्रत का संयोग व्रतधारियों को विशेष फलदायी सिद्ध हो सकता है। शुभ मुहूर्त में पूजा कर मां लक्ष्मी से सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना करें।