30 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Rashifal Desk: पंचांग के अनुसार आज 30 जनवरी 2026, शुक्रवार को माघ माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है। इस दिन जया एकादशी व्रत का पारण किया जाएगा और साथ ही शुक्र प्रदोष व्रत भी रखा जाएगा। सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। आज के दिन कई शुभ योग भी बन रहे हैं, जिससे व्रत और पूजन का फल और अधिक बढ़ जाता है।
आज की तिथि और योग
तिथि: शुक्ल द्वादशी (प्रातः 11:09 बजे तक)
मास (पूर्णिमांत): माघ
दिन: शुक्रवार
संवत्: 2082
योग: वैधृति (सायं 04:58 बजे तक)
करण: बालव (प्रातः 11:09 बजे तक), कौलव (रात्रि 09:46 बजे तक)
सूर्योदय और सूर्यास्त
सूर्योदय: प्रातः 07:10 बजे
सूर्यास्त: सायं 05:58 बजे
चंद्रोदय: दोपहर 03:06 बजे
चंद्रास्त: 31 जनवरी को प्रातः 05:54 बजे
आज के शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 बजे से 12:56 बजे तक
अमृत काल: सायं 06:18 बजे से 07:46 बजे तक
आज के अशुभ समय
राहुकाल: प्रातः 11:14 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक
गुलिकाल: प्रातः 08:31 बजे से 09:52 बजे तक
यमगण्ड: सायं 03:17 बजे से 04:38 बजे तक
आज का नक्षत्र
आज चंद्रमा आर्द्रा नक्षत्र में स्थित रहेंगे, जो 31 जनवरी की रात्रि 03:27 बजे तक रहेगा।
आर्द्रा नक्षत्र के जातक बुद्धिमान और चतुर माने जाते हैं, हालांकि इन्हें जल्द गुस्सा आने की प्रवृत्ति भी हो सकती है। इस नक्षत्र के स्वामी राहु देव, राशि स्वामी बुध देव और देवता रुद्र (भगवान शिव) हैं।
शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व
शुक्र प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। जब प्रदोष व्रत शुक्रवार को पड़ता है, तब इसका विशेष फल बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत से वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। विशेष रूप से महिलाएं दांपत्य सुख और परिवार की खुशहाली के लिए यह व्रत करती हैं।
शुक्र प्रदोष व्रत विधि
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
दिनभर उपवास रखें या सात्विक भोजन करें।
सायंकाल प्रदोष काल में पुनः स्नान कर भगवान शिव की पूजा करें।
शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक करें।
बेलपत्र, सफेद फूल और अक्षत अर्पित करें।
शिव मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र का जप करें और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें।
अंत में भगवान शिव की आरती करें और अगले दिन व्रत का पारण करें।











