आज का पंचांग 12 नवंबर 2025: जानें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, योग और राहुकाल का समय

आज का पंचांग 12 नवंबर 2025: जानें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, योग और राहुकाल का समय

12 नवंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

Rashifal Desk: आज का पंचांग 12 नवंबर 2025: कालभैरव जयंती आज, जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, योग, नक्षत्र और पूजा विधि
आज 12 नवंबर 2025, बुधवार को मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। हिंदू धर्म में यह तिथि अत्यंत शुभ मानी जाती है क्योंकि इसी दिन भगवान शिव के उग्र रूप भैरव देव का अवतरण हुआ था। इस पावन अवसर को कालभैरव जयंती के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन कालभैरव की आराधना करने से भय, रोग, शत्रु और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।

🌙 आज का पंचांग (Aaj Ka Panchang 12 November 2025)
तिथि: कृष्ण अष्टमी
दिन: बुधवार
मास: मार्गशीर्ष
संवत्: 2082
तिथि का समय: सप्तमी रात्रि 11:08 बजे तक
योग: शुभ प्रातः 09:44 बजे तक
करण: विष्टि प्रातः 11:32 बजे तक, इसके बाद बव

☀️ सूर्योदय और सूर्यास्त
सूर्योदय: प्रातः 06:41 बजे
सूर्यास्त: सायं 05:29 बजे
चंद्रोदय: 13 नवंबर, रात 12:22 बजे
चंद्रास्त: दोपहर 01:19 बजे
सूर्य राशि: तुला
चंद्र राशि: कर्क
पक्ष: कृष्ण

🕉️ आज के शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: नहीं है
अमृत काल: सायं 04:58 से 06:35 बजे तक

🚫 आज के अशुभ समय
राहुकाल: दोपहर 12:05 से 01:26 बजे तक
गुलिकाल: प्रातः 10:44 से 12:05 बजे तक
यमगण्ड: प्रातः 08:02 से 09:23 बजे तक

🌟 आज का नक्षत्र
आश्लेषा नक्षत्र: सायं 06:35 बजे तक
नक्षत्र स्वामी: बुध देव
देवता: नाग
राशि स्वामी: चंद्र देव
विशेषताएं: आश्लेषा नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति बुद्धिमान, कूटनीतिक, रहस्यप्रिय और तंत्र-मंत्र में रुचि रखने वाले माने जाते हैं।

🕯️ कालभैरव जयंती का धार्मिक महत्व
पुराणों के अनुसार, आज ही के दिन भगवान शिव ने ब्रह्मा जी के अहंकार को नष्ट करने के लिए कालभैरव रूप धारण किया था। इसलिए इस तिथि को धर्म की रक्षा और अहंकार के दमन का प्रतीक माना जाता है। भक्त इस दिन भैरव देव की पूजा, रात्रि जागरण और दीपदान करते हैं।
मान्यता है कि कालभैरव पूजा से:
भय और नकारात्मकता दूर होती है।
शत्रु शांत होते हैं।
मानसिक शांति और आत्मबल प्राप्त होता है।

🙏 कालभैरव जयंती पूजा विधि (Kaal Bhairav Puja Vidhi)
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
भगवान शिव और भैरव देव का ध्यान करें।
भैरव देव की मूर्ति या चित्र के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
काले तिल, उड़द, इत्र, पुष्प, नारियल और सुपारी अर्पित करें।
भैरव अष्टक, भैरव चालीसा या कालभैरव स्तोत्र का पाठ करें।
कुत्ते को भोजन कराएं — यह भैरव देव को अति प्रिय है।
मंदिर में दीपदान और रात्रि जागरण करें।
इस विधि से की गई पूजा से व्यक्ति के जीवन में साहस, आत्मविश्वास और स्थिरता आती है, और सभी बाधाएं दूर होती हैं।