21 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Business Desk: जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच ग्लोबल इक्विटी बाजारों में भारी दबाव देखने को मिल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों, ग्रीनलैंड को लेकर बढ़े विवाद और नाटो के कुछ देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी का असर मंगलवार को अमेरिकी बाजारों पर साफ दिखा। शुरुआती कारोबार में S&P 500 करीब 1.3 फीसदी टूट गया, डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 642 अंक यानी लगभग 1.3 फीसदी गिर गया, जबकि नैस्डैक कंपोजिट में 1.5 फीसदी की तेज गिरावट दर्ज की गई।
उधर, भारतीय शेयर बाजार में भी गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते सात हफ्तों में सेंसेक्स करीब 3,800 अंकों से ज्यादा टूट चुका है। ऐसे माहौल में निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि बाजार में बने रहें या फिलहाल बाहर निकलना बेहतर होगा।
एक्सपर्ट की क्या है सलाह?
Indiacharts और Strike Money के संस्थापक रोहित श्रीवास्तव का मानना है कि मौजूदा हालात सिर्फ एक सामान्य करेक्शन नहीं हैं, बल्कि ग्लोबल इक्विटी बाजार किसी बड़े रिवर्सल के शुरुआती चरण में प्रवेश कर सकते हैं। इसी वजह से उन्होंने निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। रोहित श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने अपने निजी पोर्टफोलियो में फिलहाल 100 फीसदी कैश बनाए रखा है, जबकि अपने क्लाइंट्स को 30 से 50 फीसदी तक कैश होल्ड करने की रणनीति अपनाने को कहा है।
लंबे समय तक रह सकती है अनिश्चितता
CNBC-TV18 से बातचीत में रोहित श्रीवास्तव ने कहा कि अब तक बाजारों में तेजी का दौर अच्छा रहा है, लेकिन मौजूदा गिरावट को केवल तकनीकी या ट्रेडिंग करेक्शन मानना सही नहीं होगा। उनके मुताबिक यह एक बड़े जियोपॉलिटिकल मुद्दे का रूप ले चुका है, जिसका असर लंबे समय तक बाजारों पर बना रह सकता है। ऐसे विवाद जल्दी सुलझते नहीं हैं और कई महीनों तक अनिश्चितता बनी रह सकती है, जिससे आगे भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
भारतीय बाजार का हाल
भारतीय शेयर बाजार में भी हाल के दिनों में बड़ा रिवर्सल देखने को मिला है। नए साल की शुरुआत में निफ्टी 50 अपने ऑल-टाइम हाई पर पहुंचा था, लेकिन उसके बाद से बाजार में तेज गिरावट आई है। 2 जनवरी के शिखर से अब तक बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का करीब 300 अरब डॉलर का मार्केट कैप साफ हो चुका है।
आगे की रणनीति क्या हो?
रोहित श्रीवास्तव का कहना है कि निवेशकों को मानसिक रूप से सबसे खराब हालात के लिए तैयार रहना चाहिए। उनके अनुसार ग्लोबल इक्विटी बाजारों में अभी 10 से 20 फीसदी तक और गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में पहले सतर्कता और कैश तैयार रखना जरूरी है, ताकि जोखिम को सीमित किया जा सके और भविष्य में बेहतर मौके मिलने पर निवेश किया जा सके।













