22 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Himachal Desk: हिमाचल प्रदेश में पुराने बिजली मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने की प्रक्रिया तेज़ हो गई है। इस बीच राज्य बिजली बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने से बिजली सब्सिडी, टैरिफ या 125 यूनिट तक मिलने वाली मुफ्त बिजली योजना पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बोर्ड के अनुसार, उपभोक्ताओं को मिलने वाली सभी सुविधाएं पहले की तरह जारी रहेंगी और स्मार्ट मीटर के कारण बिजली बिलों में किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं होगी।
बिजली बोर्ड प्रबंधन ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को खारिज करते हुए बताया कि अब तक प्रदेश में करीब 7.5 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। अधिकारियों ने कहा कि स्मार्ट मीटर केवल बिजली खपत मापने का आधुनिक उपकरण है, जिसका बिजली दरों या बिलिंग नीति से कोई सीधा संबंध नहीं है। गलत जानकारी के कारण तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।
औसत बिल से मिलेगी राहत
बोर्ड के अनुसार, पुराने मीटरों में कई बार बिजली उपयोग न होने पर भी औसत रीडिंग के आधार पर बिल जारी कर दिया जाता था। स्मार्ट मीटर में यह समस्या नहीं होगी, क्योंकि बिल केवल वास्तविक खपत के आधार पर ही तैयार किया जाएगा। यदि उपभोक्ता बिजली का उपयोग नहीं करता है, तो उसे औसत बिल नहीं मिलेगा।
रियल-टाइम डाटा से होगी सटीक बिलिंग
अधिकारियों ने बताया कि स्मार्ट मीटर से बिजली खपत का डाटा सीधे केंद्रीय डाटा सेंटर तक पहुंचता है। इससे बिलिंग प्रक्रिया अधिक सटीक होगी, ऑनलाइन सेवाओं में सुधार आएगा और उपभोक्ताओं को ज्यादा पारदर्शिता मिलेगी। यह व्यवस्था अनुमानित बिलिंग की जगह रियल-टाइम डाटा आधारित प्रणाली को अपनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर की रीडिंग पर संदेह हो, तो सरकार ने मौजूदा मीटर के साथ एक अतिरिक्त स्मार्ट मीटर लगाने की अनुमति दी है। इससे उपभोक्ता हर 15 मिनट में अपनी बिजली खपत की जानकारी खुद देख सकता है। किसी भी समस्या की स्थिति में संबंधित विद्युत उपमंडल कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।
बिजली बोर्ड ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें और सही जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें।












