15 January 2026 Fact Recorder
Business Desk: दुनिया की अर्थव्यवस्था इन दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर काफी हद तक निर्भर नजर आ रही है। ईरान को लेकर जैसे ही ट्रंप ने यह संकेत दिया कि अमेरिका फिलहाल उस पर सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा, वैसे ही अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली।
बीते छह दिनों से लगातार चढ़ रहा कच्चा तेल अचानक फिसल गया। ब्रेंट क्रूड की कीमत 65 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड करीब 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। कुल मिलाकर तेल की कीमतों में लगभग 3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
दरअसल, ट्रंप के बयान के बाद बाजार में यह धारणा बनी कि ईरान पर तत्काल हमले का खतरा टल गया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई रोकने का भरोसा दिया है, जिससे युद्ध और तेल सप्लाई बाधित होने की आशंका फिलहाल कम हो गई है। इसी राहत ने तेल की कीमतों पर दबाव बना दिया।
हालांकि हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। ईरान में तनाव अब भी बना हुआ है और सुरक्षा कारणों से कुछ इलाकों में हवाई सेवाएं सीमित कर दी गई हैं। अमेरिका ने भी एहतियातन अपने कुछ सैनिकों को दूसरे ठिकानों पर शिफ्ट किया है।
इस साल तेल की कीमतों में तेजी का बड़ा कारण ईरान और वेनेजुएला जैसे देशों में राजनीतिक अस्थिरता रही है। इसी बीच ट्रंप ने वेनेजुएला के नेतृत्व से बातचीत कर संकेत दिए हैं कि अमेरिका ओपेक में उसकी भूमिका का समर्थन कर सकता है, जिससे बाजार में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं।
कमोडिटी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव दोबारा बढ़ता है, तो कच्चा तेल एक बार फिर 75 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। वहीं अगर हालात काबू में रहते हैं, तो कीमतों में और नरमी देखने को मिल सकती है।
यानी फिलहाल बाजार को राहत जरूर मिली है, लेकिन ईरान-अमेरिका तनाव की एक चिंगारी ही तेल को फिर से महंगा कर सकती है।













