15 दिसंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
Business Desk: भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने पिछले 25 वर्षों में ऐतिहासिक छलांग लगाते हुए निवेश की दुनिया की तस्वीर ही बदल दी है। साल 2000 में जहां इंडस्ट्री का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) महज करीब ₹1 लाख करोड़ था, वहीं नवंबर 2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर ₹80.80 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह सफर सिर्फ आंकड़ों की बढ़ोतरी नहीं, बल्कि भारतीय निवेशक की बदलती सोच और परिपक्वता का प्रमाण है।
UTI के वर्चस्व से SIP के युग तक
साल 2000 में म्यूचुअल फंड बाजार पर यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया (UTI) का दबदबा था, जिसकी हिस्सेदारी करीब 66% थी। उस दौर में शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड को जोखिम भरा माना जाता था। लेकिन समय के साथ तस्वीर बदली और आज SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) ने निवेश को आम आदमी की आदत बना दिया है।
5 साल में तीन गुना ग्रोथ
खास बात यह है कि 2020 से 2025 के बीच सिर्फ पांच सालों में ही इंडस्ट्री का आकार लगभग तीन गुना हो गया। कोरोना काल के बाद बाजार में आई तेजी और निवेशकों के बढ़ते भरोसे ने इस ग्रोथ को नई रफ्तार दी।
SIP बना करोड़ों निवेशकों का भरोसेमंद साथी
इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा योगदान SIP और छोटे निवेशकों का है। निवेश अब मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रहा। छोटे शहरों और कस्बों से बड़ी संख्या में लोग म्यूचुअल फंड से जुड़ रहे हैं। मई 2021 में जहां म्यूचुअल फंड फोलियो की संख्या 10 करोड़ थी, वहीं नवंबर 2025 तक यह बढ़कर 25.86 करोड़ हो गई है। इसमें इक्विटी और हाइब्रिड फंड्स की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है।
क्यों बढ़ा निवेशकों का भरोसा?
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए निवेश की आसान प्रक्रिया, वित्तीय समावेशन, इक्विटी बाजारों का मजबूत प्रदर्शन और लंबी अवधि के बेहतर रिटर्न—ये सभी कारण निवेशकों के भरोसे को लगातार मजबूत कर रहे हैं। आज भारतीय निवेशक बाजार के उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय दीर्घकालिक लक्ष्यों पर फोकस कर रहा है।
कुल मिलाकर, म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की यह 25 साल की यात्रा भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी सफलता की कहानियों में शुमार हो चुकी है।











