29 दिसंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
Chandigarh Desk: डिजिटल दौर में साइबर अपराधी व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग ऐप्स का दुरुपयोग कर लोगों को ठगी के जाल में फंसा रहे हैं। पहले छोटे टास्क के बदले मामूली रकम देकर भरोसा बनाया जाता है, फिर निवेश बढ़ाने का लालच देकर खातों से लाखों रुपये साफ कर दिए जाते हैं। अब इस ठगी का शिकार सिर्फ आम लोग नहीं, बल्कि वीआईपी भी हो रहे हैं।
हाल ही में पंजाब में पूर्व आईपीएस अधिकारी अमर सिंह चहल 8.10 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के बाद आत्महत्या कर बैठे। वहीं, ओसवाल ग्रुप के चेयरमैन एसपी ओसवाल को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का झांसा देकर निशाना बनाया गया। ठगों ने चहल को व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर मोटे मुनाफे का लालच दिया और धीरे-धीरे बड़ी रकम फंसा ली।
कैसे काम करता है ठगी का तंत्र
साइबर ठग सबसे पहले व्हाट्सएप पर पेज लाइक करने या गूगल रेटिंग देने जैसे आसान काम का ऑफर देते हैं। प्रति टास्क 50 रुपये तक का भुगतान कर विश्वास जीता जाता है। इसके बाद टेलीग्राम पर कथित ‘टीचर’ या ‘मैनेजर’ से संपर्क करवाकर निवेश की शुरुआत कराई जाती है।
ठगी के चरण
शुरुआती टास्क में कम निवेश पर छोटा मुनाफा दिखाया जाता है।
अगले टास्क के लिए निवेश राशि लगातार बढ़ाई जाती है।
मुनाफा केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दिखता है, असल में पैसा वापस नहीं मिलता।
टास्क अधूरे छोड़ने पर पूंजी और मुनाफा जब्त होने की धमकी दी जाती है।
अंत में टेलीग्राम ग्रुप और अकाउंट डिलीट कर दिए जाते हैं।
नकली भरोसे का खेल
ठग टेलीग्राम ग्रुप में सैकड़ों फर्जी निवेशकों के मुनाफे के स्क्रीनशॉट शेयर करते हैं, जिससे पीड़ित को लगता है कि वह अकेला नहीं है। इसी भरोसे में लोग और पैसा लगाते चले जाते हैं और बड़ी ठगी का शिकार हो जाते हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, मोटे मुनाफे का लालच ही ठगों का सबसे बड़ा हथियार है। ऐसे मामलों में समय रहते सतर्कता और शिकायत दर्ज कराना बेहद जरूरी है, ताकि मानसिक और आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।













