27 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
National Desk: दुनिया भर में प्लास्टिक का इस्तेमाल घटने के बजाय लगातार बढ़ रहा है, जिसका सीधा और गंभीर असर मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक नई स्टडी के मुताबिक, अगर प्लास्टिक खपत का मौजूदा रुझान जारी रहा तो साल 2040 तक प्लास्टिक से जुड़ी बीमारियों का बोझ 2016 की तुलना में दोगुने से भी अधिक हो सकता है।
अध्ययन में बताया गया है कि प्लास्टिक सिस्टम से निकलने वाले उत्सर्जन—जिनमें ग्रीनहाउस गैसें, वायु प्रदूषक कण और फैक्ट्रियों से निकलने वाले जहरीले रसायन शामिल हैं—ग्लोबल वार्मिंग, कैंसर और अन्य खतरनाक बीमारियों को बढ़ावा दे रहे हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, सबसे ज्यादा नुकसान प्लास्टिक के शुरुआती उत्पादन चरण और खुले में प्लास्टिक जलाने से हो रहा है।
पूरे लाइफसाइकिल में छिपा है खतरा
लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन और फ्रांस के कई संस्थानों के वैज्ञानिकों ने प्लास्टिक के पूरे जीवनचक्र—कच्चे माल के निष्कर्षण, पॉलीमर उत्पादन, उपयोग, रीसाइक्लिंग, डंपसाइट और खुले में जलाने—से होने वाले स्वास्थ्य प्रभावों का आकलन किया। यह पहली ग्लोबल-स्केल स्टडी है, जो ग्रीनहाउस गैसों, वायु प्रदूषकों और जारी रसायनों से जुड़े डिसएबिलिटी एडजस्टेड लाइफ ईयर्स (DALYs) के आधार पर सेहत पर असर का अनुमान लगाती है।
शोध में यह भी सामने आया कि प्लास्टिक की रासायनिक संरचना की पारदर्शिता की कमी प्रभावी नीतियां बनाने में बड़ी बाधा है। इससे लाइफसाइकिल असेसमेंट और जोखिम आकलन सीमित हो जाते हैं।
2100 तक उत्पादन चरम पर न पहुंचे, चेतावनी
स्टडी में चेताया गया है कि अगर प्लास्टिक का वैश्विक उत्पादन 2100 तक चरम पर पहुंचा, तो पहले से ही दबाव में मौजूद पर्यावरण और स्वास्थ्य प्रणालियों पर बोझ और बढ़ जाएगा। 2016 से 2040 के बीच ‘बिजनेस-एज़-यूज़ुअल’ परिदृश्य में प्लास्टिक सिस्टम से जुड़े स्वास्थ्य नुकसान दोगुने से अधिक होने का अनुमान है।
नीति बदलाव और उत्पादन में कटौती जरूरी
लेखकों ने जोर दिया कि प्राथमिक (वर्जिन) प्लास्टिक उत्पादन में भारी कटौती आवश्यक है। गैर-जरूरी उपयोगों के लिए नए प्लास्टिक के उत्पादन को सख्ती से नियंत्रित करने और पूरी लाइफसाइकिल को ध्यान में रखकर समन्वित वैश्विक नीति अपनाने की सिफारिश की गई है।
ग्लोबल प्लास्टिक ट्रीटी की दिशा में कदम
रिसर्च के मुताबिक, प्लास्टिक उत्सर्जन और उससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को प्रभावी ढंग से घटाने के लिए वैश्विक सहयोग अहम है। इसी दिशा में 175 से अधिक देशों ने ग्लोबल प्लास्टिक ट्रीटी पर सहमति जताई है, जिस पर काम जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ठोस नीतिगत कदम और उत्पादन में कटौती ही मानव सेहत और पर्यावरण की रक्षा कर सकती है।













