18 January 2026 Fact Recorder
National Desk: माले में भारत, मालदीव और श्रीलंका के बीच त्रिपक्षीय समुद्री अभ्यास DOSTI (दोस्ती) अभ्यास के 17वें संस्करण की औपचारिक शुरुआत हो गई है। भारतीय तट रक्षक बल (Indian Coast Guard) के अनुसार, इस अभ्यास का बंदरगाह चरण माले में शुरू हुआ है, जिसमें इंडियन कोस्ट गार्ड, श्रीलंका कोस्ट गार्ड और मालदीव नेशनल डिफेंस फोर्स (MNDF) संयुक्त रूप से भाग ले रहे हैं।
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना, समुद्री प्रदूषण नियंत्रण, खोज एवं बचाव कार्यों में समन्वय बढ़ाना और तीनों देशों के तट रक्षक बलों के बीच आपसी तालमेल व इंटरऑपरेबिलिटी को सुदृढ़ करना है। बंदरगाह चरण के दौरान पॉल्यूशन रिस्पॉन्स इक्विपमेंट, टेबलटॉप एक्सरसाइज और क्रॉस-बोर्डिंग स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का लाइव प्रदर्शन किया गया।
भारतीय तट रक्षक बल ने बताया कि इस चरण में MARPOL और VBSS (Visit, Board, Search and Seizure) से जुड़ी संयुक्त ट्रेनिंग भी शामिल है, जिससे आपसी सीख और परिचालन क्षमता को बढ़ाया जा सके। आगामी समुद्री चरण में भारतीय तट रक्षक बल के जहाज और विमान भी अभ्यास में भाग लेंगे।
भारतीय तट रक्षक बल के महानिदेशक ने मालदीव नेशनल डिफेंस फोर्स के प्रमुख के साथ द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। यह पहल भारत के ‘सागर’ (SAGAR) विजन और ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के अनुरूप मानी जा रही है।
मालदीव नेशनल डिफेंस फोर्स के अनुसार, DOSTI-17 का उद्घाटन 17 जनवरी को माले में आयोजित एक समारोह में किया गया, जिसमें मालदीव के रक्षा मंत्री मोहम्मद घसन मौमून मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने तीनों देशों के तट रक्षक बलों के बीच निरंतर सहयोग और समन्वय को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया।
इस वर्ष के अभ्यास में संयुक्त प्रशिक्षण और सूचना साझा करने पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि प्रतिभागी अपनी विशेषज्ञता साझा कर सकें और पेशेवर संबंधों को और मजबूत बना सकें। उल्लेखनीय है कि ‘दोस्ती’ अभ्यास की शुरुआत वर्ष 1991 में भारत और मालदीव के बीच द्विपक्षीय अभ्यास के रूप में हुई थी, जिसे वर्ष 2012 में श्रीलंका को शामिल कर त्रिपक्षीय रूप दिया गया। तब से यह अभ्यास क्षेत्रीय समुद्री सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है।
उद्घाटन समारोह में मालदीव सरकार के कई मंत्री, चीफ ऑफ डिफेंस फोर्स मेजर जनरल इब्राहिम हिल्मी, वाइस चीफ ऑफ डिफेंस फोर्स ब्रिगेडियर जनरल अहमद गियास, भारत और श्रीलंका के तट रक्षक बलों के महानिदेशक तथा विभिन्न देशों के राजनयिक भी मौजूद रहे।













