10 नवंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
Education Desk: अनिवार्य TET के विरोध में देशभर के शिक्षक करेंगे दिल्ली में प्रदर्शन, ABRSM ने NCTE से मांगा हस्तक्षेप
सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले में पहले से पढ़ा रहे शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET)** को अनिवार्य कर दिया गया है। इस निर्णय के बाद देशभर के लाखों शिक्षकों में असंतोष है। अनिवार्य TET के विरोध में शिक्षक संगठन अब दिल्ली में बड़ा आंदोलन करने की तैयारी कर रहे हैं।
5 दिसंबर को दिल्ली में होगी शिक्षकों की महारैली
देशभर के शिक्षक 5 दिसंबर को दिल्ली में महारैली आयोजित करेंगे। इस रैली में करीब दो लाख से अधिक शिक्षकों के शामिल होने की उम्मीद है, जिनमें से एक लाख से ज्यादा शिक्षक उत्तर प्रदेश से होंगे। इसके लिए शिक्षकों के विभिन्न संगठनों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जानकारी के मुताबिक इस रैली में 14 राज्यों के शिक्षक भाग लेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से 20 लाख शिक्षक प्रभावित
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार अब सभी शिक्षकों को TET उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। इसका असर देशभर में लगभग 20 लाख शिक्षकों पर पड़ेगा, जिन्हें सेवा में रहते हुए परीक्षा देनी होगी। इस फैसले के बाद शिक्षकों में भारी तनाव है, और हाल ही में उत्तर प्रदेश में दो शिक्षकों द्वारा आत्महत्या करने की घटनाएं भी सामने आई हैं।
ABRSM ने NCTE चेयरमैन से की मुलाकात
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से संबद्ध शिक्षक संगठन अखिल भारतीय राष्ट्रीय शिक्षक महासंघ (ABRSM) ने इस मुद्दे पर NCTE चेयरमैन राजेश अरोड़ा से मुलाकात की है। महासंघ की महामंत्री प्रो. गीता भट्ट ने कहा कि शिक्षकों को राहत केवल संसद या कानून के माध्यम से ही मिल सकती है। उन्होंने NCTE से मामले में हस्तक्षेप करने और व्यवहारिक समाधान निकालने की मांग की है।
राज्यवार कटऑफ वर्ष तय करने की मांग
ABRSM ने यह भी कहा कि NCTE की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना के अनुसार आरटीई अधिनियम के तहत कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने के लिए TET को अनिवार्य किया गया है। लेकिन कई राज्यों में आरटीई बाद में लागू हुआ है — जैसे जम्मू-कश्मीर में 2019 में। इसलिए संगठन ने राज्यवार कटऑफ वर्ष तय करने की मांग की है ताकि पुराने शिक्षकों को राहत दी जा सके।
निष्कर्ष:
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से असंतुष्ट शिक्षक संगठनों ने अब केंद्र सरकार और NCTE से राहत की गुहार लगाई है। वहीं 5 दिसंबर को दिल्ली में होने वाली महारैली में यह मुद्दा जोर-शोर से उठाया जाएगा।













